सेमरा के पूर्वी भाग की तरफ हुआ कटान।
गंगा के जलस्तर मे वृद्धि होने से सेमरा एवं शिवरायकापुरा के लोगों को गांव के अस्तित्व को लेकर चिंता सताने लगी है। पिछले वर्ष आई बाढ़ में गांव को बचाने के लिए बनी ठोकर का कुछ हिस्सा बह गया तो कुछ हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था।
इसकी मरम्मत कराए जाने की मांग ग्रामवासी पिछले एक वर्ष से कर रहे हैं लेकिन बरसात शुरू होने से पहले क्षतिग्रस्त ठोकर की मरम्मत न होने से गांव के अस्तित्व को खतरा पैदा हो गया है। सेमरा एवं शिवरायकापुरा को गंगा के कटान से बचाने के लिए पिछली प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2014 में 23 करोड़ रुपये खर्च कर बोल्डर पिचिंग का कार्य कराकर ठोकर का निर्माण कराया गया।
ठोकर निर्माण में विभागीय अधिकारियों की ओर से मानक की अनदेखी एवं तकनीकी समस्याओं पर ध्यान न दिए जाने के चलते वर्ष 2016 में आई बाढ़ से जगह-जगह ठोकर टूटकर गंगा में बह गई। सेमरा गांव के पश्चिमी सिरे पर हरिशंकर यादव के मकान के पास से निकलने वाले नाले का गंदा पानी सीधे गंगा में गिरा देने से वहां की मिट्टी टूटनी शुरू हो गई और उसका दुष्परिणाम यह हुआ कि वहां पर 50 मीटर ठोकर क्षतिग्रस्त हो गई।
विधायक अलका राय के प्रयास से ठोकर मरम्मत के लिए लगभग 12 करोड़ रुपये की स्वीकृति हुई लेकिन धनराशि अवमुक्त न होने के कारण बरसात का मौसम शुरू होने से पूर्व ठोकर मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो पाया। अब तो गांव वाले भी ठोकर की मरम्मत कराए जाने के पक्ष में नहीं हैं।
उनका कहना है कि बरसात शुरू हो जाने और गंगा के जलस्तर में वृद्धि हो जाने के बाद ठोकर का मरम्मत शुरू करके सिंचाई विभाग के अधिकारी एवं उनके चहेते ठेकेदार पहले की तरह इस वर्ष भी मरम्मत के लिए स्वीकृत धनराशि की बंदरबांट कर लेंगे। लोगों ने कटान वाले स्थानों पर बालू की बोरी आदि डालकर कटान से बचाव की व्यवस्था किए जाने की मांग की है।