गाजीपुर। जिले में एकाएक बढ़े कोरोना मरीजों की संख्या को लेकर लोग चिंतित हैं। पिछले दो दिनों में 17 कोरोना संक्रमितों के मिलने से लोगों के होश उड़ गए हैं। जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा प्रवासी मजदूरों को लेकर सजग और सतर्क है। शनिवार को गैर प्रांतों से आने वाले प्रवासी मजदूरों को जिले में प्रवेश करने के साथ ही बार्डर पर रोक दिया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैदपुर के परिसर में इनका रजिस्ट्रेशन तथा थर्मल स्क्रीनिंग कराया गया। इस दौरान चिलचिलाती धूप में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए इन्हें घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। सायंकाल तक कुल 458 लोगों का थर्मल स्क्रीनिंग किया गया। स्वस्थ पाए जाने पर सभी को होम क्वारंटीन कर दिया गया। इन प्रवासी मजदूरों में करीब 150 श्रमिक स्पेशल ट्रेन से आए थे, जिन्हें औड़िहार जंक्शन पर उतारा गया था। स्पेशल ट्रेन गाजियाबाद से मऊ प्रवासी मजदूरों को लेकर जा रही थी।
जनपद में शनिवार को 300 लोगों की जांच रिपोर्ट आनी थी लेकिन एक भी रिपोर्ट न आने से जिला प्रशासन ने राहत की सांस ली। देखा जाए तो स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो दिन के भीतर 193 संदिग्ध व्यक्तियों की सैंपलिंग की है। अब तक कोरोना संदिग्धों की कुल सैंपलिंग 1518 तक पहुंच गई है। इनमें से अब तक 27 की रिपोर्ट पाजिटिव मिली है। इसमें छह को ठीक किया जा चुका है। 21 का इलाज वाराणसी में चल रहा है। वर्तमान में जनपद के विभिन्न गांवों में कुल 13 हॉटस्पाट बनाए गए हैं। छह हॉटस्पाट एरिया खत्म कर दिया गया है। नए हॉटस्पाट घोषित होने के बाद इन गांवों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। शुक्रवार को एक साथ मिले 13 कोरोना मरीजों को वाराणसी भेजने के बाद सायंकाल छह गांवों को हॉटस्पाट घोषित किया गया लेकिन इन गांवों में कोई आला अफसर देखने तक नहीं पहुंचा। इन गांवों को अभी तक न तो सैनिटाइज किया गया है और न ही यहां स्क्रीनिंग और सैंपलिंग का कार्य जरूरत के हिसाब से चल रहा है।
शुरुआत के दिनों में मिले कोरोना मरीजों को लेकर जिलाधिकारी ओमप्रकाश आर्य, पुलिस अधीक्षक डा. ओमप्रकाश सिंह, सीएमओ डा. जीसी मौर्य समेत अन्य पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी पूरी सक्रियता दिखा रहे थे लेकिन जैसे-जैसे मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। अफसरों के कार्य में शिथिलता आती जा रही है। शायद यही कारण रहा कि शुक्रवार को 13 मरीजों के मिलने के बाद भी हॉटस्पाट वाले गांवों में देर रात तक कोई खोजे नहीं मिल रहा था। चंद पुलिस अफसर और कर्मचारी बांस-बल्ली गाड़ने में लगे हुए थे। कोरोना संक्रमण से गांवों को बचाने की कवायद भी काफी कमजोर दिखी। दूसरे दिन शनिवार को भी इन गांवों में कुछ खास नहीं दिखा। ज्यादातर गांवों को अभी तक सैनिटाइज नहीं किया गया है।