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दोबारा मौसम बिगड़ा, बूंदाबांदी से किसान परेशान

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गाजीपुर। पिछले एक महीने के बिगड़ने और बनने से किसानों की मुसीबत बढ़ती जा रही है। पिछले दिनों जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में आंधी, तूफान, ओलावृष्टि और बारिश से चहुओर तबाही मची है। शनिवार को एकबार फिर मौसम ने करवट ली और बूंदाबांदी शुरू हो गई। दिन में रूक-रूक कर बारिश होने और आसमान में बादल छाए रहने से किसान चिंतित हैं। फसलों के नुकसान को लेकर किसानों से बातचीत की गई। इस पर उनके दर्द होठों पर आ गए। देखा जाए तो किसानों को चौतरफा मार झेलनी पड़ती है। हर साल बारिश, बाढ़, आग और सूखा से बचने के बाद ही किसानों के घर अन्न जाता है। इस बार खेत में लगी फसलों से काफी अच्छी उपज होने की उम्मीद जगी थी। लेकिन बेमौसम बारिश, आंधी, तूफान और ओलावृष्टि ने रह-रह कर तबाही मचाने का काम किया है।
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कोट:
-मौसम बार-बार करवट ले रहा है। आसमान में बादल अक्सर छा जा रहे हैं। जिससे किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। इससे पहले हुई बरसात ने किसानों की फसल को बर्बाद कर दिया था। अब अगर बरसात होती है, तो भी बची -खुची फसलों का सर्वनाश हो जाएगा।-किसान रामजी पांडेय, दुबिहां।
-मार्च महीने में भी रह-रह कर मौसम की बेरूखी से किसान परेशान हो गए हैं। असमय बरसात से किसानों की फसलें बेवजह बर्बाद हो गई है। अभी भी मौसम करवट बदल रहा है ।अगर बरसात हो गई, तो किसान के घर में एक दाना अन्न का नहीं पहुंचेगा।-हरिनारायण राजभर, दुबिहां।
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-बेमौसम बारिश का बार- बार आने से किसानों का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि इस बार बारिश होने से खेतों में खड़ी फसल गेहूं, चना, मटर, सरसों तथा प्याज का बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। यह सभी फसलें तैयार होने की स्थिति में है। वह खेतों में गिरकर सड़ रही हैं।-पूर्व प्रधान तहसीलदार सिंह, खानपुर।
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-वर्तमान में मौसम परिवर्तन को लेकर चिंतित किसान मुसीबत में पड़े हुए हैं। सरसों की फसल तैयार होकर कटने के लिए खेत में खड़ी थी। लेकिन बीते दिनों आई तेज आंधी और ओलावृष्टि सेखेतों में गिरकर सड़ रही हैं। यही एक फसल थी, जो एकदम तैयार थी और किसानों के घर में आने वाली थी। लेकिन किसानों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है।-संतलाल, खानपुर।
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बेमौसम बारिश किसानों के लिए जी का जंजाल बन चुकी है। अब तो बैंकों से लिए गए कर्ज का भुगतान करना भी मुश्किल हो गया है। इसी फसलों के भरोसे बैंकों से कृषि ऋण लेकर हम खेती करते हैं। फसलों को बेचकर बैंकों का भुगतान भी करते हैं। यह साल किसानों के लिए आफत है, लेकिन किसान कर भी क्या सकते हैं।- राजू कुशवाहा, गगरन- दिलदारनगर।
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-किसानों को बाढ़, बारिश और आगजनी तीनों का समय-समय पर शिकार होना पड़ता है। इन तीनों से बचने के बाद सूखे की मार तक झेलनी पड़ती है। इस साल रबी की फसल बेहतर होने से सभी काफी खुश थे। लोगों को दलहनी, तेलहनी से लेकर गेहूं, आलू और सब्जी की खेती से भी मुनाफा कमाने की उम्मीद थी, लेकिन बेमौसम बारिश ने किसानों को तबाह कर दिया है।- दीनानाथ सिंह, गगरन- दिलदारनगर।
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