गाजीपुर। जनपद में शनिवार को सुबह बूंदाबांदी से मौसम का मिजाज बदल गया। कोहरा छाने के साथ बारिश हुई तो आलू, गेहूं और सरसों की फसल को भारी नुकसान होगा। पूरे दिन आसमान में बादल छाए। वहीं, एक डिग्री अधिकतम तापमान में ऐसे में गिरावट आने से ठिठुरन बढ़ गई। रविवार को भी घना कोहरा छाने की संभावना जताई गई है।
शीतलहर से ठिठुर रहे जिले में सुबह बूंदाबांदी होने से गलन बढ़ गई। पूरे दिन बादल छाए रहने के कारण धूप नहीं निकली। इससे तापमान में एक डिग्री की गिरावट दर्ज हुई। जनपद का अधिकतम तापमान 17 और न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके पहले दो जनवरी को तापमान 18 और न्यूनतम अधिकतम 11 डिग्री सेल्सियस था। मौसम विभाग ने रविवार को भी घना कोहरा छाने की संभावना जताई है। फिलहाल जनपद ऑरेंज जोन में है। पांच जनवरी के बाद मौसम में सुधार होने का अनुमान है।
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पूरे दिन शीतलहर की चपेट में रहा जनपद
पूरे दिन जनपद शीतलहर की चपेट में रहा। सुबह तक घने कोहरे की चादर छाई रही। सर्द हवाएं चलने और धूप नहीं निकलने के कारण लोग ठिठुरते रहे। दिन में भी जगह-जगह लोग अलाव तापते रहे। वहीं, घरों और दुकानों में लोग हीटर के सहारे ठंड से बचने की का प्रयास करते रहे।
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ओपीडी में प्रतिदिन पहुंच रहे 100 मरीज
मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ओपीडी में मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ी है। सर्दी, जुकाम, खांसी, बुखार और बदन दर्द के करीब सौ मरीज प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आनंद मिश्रा ने बताया कि ठंड के कारण मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। हड्डी में दर्द के मरीज भी बढ़े हैं।
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तीन और चार दिसंबर को घना कोहरा रहेगा। पांच या छह दिसंबर के बाद जनपद ग्रीन जोन में आ जाएगा। भीषण ठंड को देखते हुए सतर्क रहने की जरूरत है। - अशोक राय, आपदा विशेषज्ञ गाजीपुर
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सरसों के फूल झड़ने, आलू में झुलसा रोग का खतरा
बूंदाबांदी होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। करीमुद्दीनपुर के किसान राकेश कुमार और सोहन प्रजापति का कहना है कि यदि बारिश हुई तो गेहूं पर पाला पड़ सकता है। गहमर के किसान मनोहर सिंह और श्यामू ने बताया कि बारिश के कारण सरसों के फूल झड़ सकते हैं। इससे उत्पादन प्रभावित होगा। करंडा के किसान रमेश पासवान, सुमित कुम्हार ने बताया कि मौसम इसी तरह रहा तो आलू में झुलसा रोग लग सकता है। जनपद में गेहूं की खेती बड़े पैमाने पर होती है। इसलिए किसानों को फसल के नुकसान की चिंता सता रही है। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि जनपद में एक लाख 70 हजार हेक्टेयर में गेहूं, 14 हजार हेक्टेयर में सरसों और 14 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती होती है। मौसम के बदले मिजाज को देखते हुए किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है।
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सल्फर पाउउर का करें छिड़काव : डॉ. ओमकार
फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. ओमकार सिंह ने बताया कि ऐसे मौसम में गेहूं, सरसों और आलू को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। आलू की पिछैती फसल झुलसा रोग से प्रभावित हो सकली है। सरसों के फूल झड़ने और गेहूं पर पाला का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में किसान सूर्यास्त के बाद खेत की मेड़ पर धुआं करें। सल्फर पाउडर का छिड़काव करना भी फायदेमंद होता है। शाम के समय हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
इस मौसम में आलू के साथ सब्जी के फसलों के नुकसान का खतरा बना रहता है। बारिश हुई तो झुलसा रोग के प्रकोप से आलू की फसल बरबाद हो सकती है। - भरत राय, असावर
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यह मौसम शिमला मिर्च, टमाटर, मिर्च, मटर की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। फसल खराब हुई तो उत्पादन प्रभावित होगा। इससे किसान चिंतित हैं। - पंकज राय, करीमुद्दीनपुर
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इस समय में सरसों में भरपूर फूल आ गए हैं। अच्छा उत्पादन होने की उम्मीद है लेकिन बूंदाबांदी ने चिंता बढ़ा दी है। अगर मौसम इसी तरह रहा तो नुकसान होगा। - विद्याशंकर उपाध्याय, गहमर
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मौसम के मिजाज परेशान करने वाला है। काफी मेहनत के बाद फसल तैयार हुई है। मौसम इसी तरह बना रहा तो किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है। - विनोद सिंह, मंगारी