बिजली निगम की टीम बृहस्पतिवार को कसेरुवा गांव में बकाया वसूली करने गई थी। टीम के पहुंचते ही ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया।
टीम के चार पहिया वाहन के सामने लकड़ी का बोटा रख दिया गया। महिलाओं ने वाहन को घेर लिया। कुछ महिलाओं के हाथों में ईंटें थीं। अभियंता और कर्मचारी ग्रामीणों के तेवर देखकर वाहन के अंदर ही बैठे रहे। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाकर मामला शांत कराया।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2018 में बिजली कनेक्शन दिया गया था। उस समय कहा गया था कि बिल का भुगतान नहीं करना है। बिजली निशुल्क है। अब बताया जा रहा है कि एक उपभोक्ता पर 18 से 20 हजार रुपये तक बकाया है। हम मजदूरी करने वाले लोग हैं। इतनी बड़ी धनराशि का भुगतान कैसे कर सकते हैं। वहीं बिजली निगम के अभियंता निशुल्क बिजली देने की बात से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार-बार नोटिस देने के बाद भी उपभोक्ता बकाए बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं। इसी क्रम में टीम वसूली के लिए गई थी लेकिन ग्रामीणों की ओर से अभद्रता किया गया।
एसडीओ कमलेश कुमार का कहना है कि बकाया वसूली करने गई टीम के साथ अभद्रता की गई है। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। जो बकायेदार हैं, वह बकाये का भुगतान कर दें। इस मौके पर अवर अभियंता सुरेश कुमार, नोडल अधिकारी रमाशंकर, धनंजय, राजेंद्र आदि थे।