काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. हरिकेश सिंह ने कहा कि जिस दिन देश का किसान खुशहाल हो जाएगा, उस दिन देश संपन्न हो जाएगा। इसके लिए किसानों को जाति-बिरादरी से ऊपर उठकर किसान हित के लिए संघर्ष करना होगा।
यह बातें उन्होंने स्वामी सहजानंद सरस्वती की स्वामी सहजानंद स्नातकत्तर महाविद्यालय के सभागार में अखिल भारतीय किसान सभा की ओर से आयोजित पुण्यतिथि कार्यक्रम में कही। इस अवसर पर काशी विद्यापीठ के प्रो. सुरेंद्रप्रताप सिंह
ने कहा कि स्वामी जी मार्क्सवाद से बेहद लगाव रखते थे। वे कभी वामपंथी पार्टियों के सदस्य नहीं हुए, लेकिन किसानों और मजदूरों के संघर्ष के सवाल पर कम्युनिस्ट नेताओं को साथ लेकर संघर्ष करते थे। यूपी कालेज के प्रो. महेंद्रप्रताप
सिंह ने कहा कि स्वामी सहजानंद की जीवन यात्रा एक संन्यासी से ऊपर उठकर मार्क्सवादी विचारक और भारत में एक संगठित किसान आंदोलन के जनक के रूप में स्थापित हो गई। वर्तमान भारतीय किसान आंदोलन को भी संगठित
होकर कारपोरेट घरानों और पूंजीवादी सरकारों के खिलाफ लामबंद होकर संघर्ष करना होगा। प्रदेश महामंत्री राजेंद्र यादव ने कहा कि आने वाला दिन प्रदेश और देश में किसानों और मजदूरों की संगठित एकता का होगा। कार्यक्रम में किसान
सभा की तरफ से वरिष्ठ किसान सदानंद तिवारी, गणेश यादव, फेंकू सिंह और हरिश्चंद्र को सम्मानित किया गया। गोष्ठी में प्रो. केएन सिंह, समरबहादुर सिंह, व्यासमुनि राय, जितेंद्र घोष, शफीक अहमद, अशोक मिश्र, कृपाशंकर सिंह, प्रदीप
सिंह, डा. इकबाल अंसारी, सुबच्चन यादव आदि ने विचार व्यक्त किया। अध्यक्षता डा. रामबदन सिंह और संचालन मंत्री सुरेंद्रप्रताप चंचल ने किया। स्वामी सहजानंद पीजी कालेज के कुबेरनाथ राय सभागार में किसान आंदोलन में स्वामी जी
की भूमिका विषयक गोष्ठी में महाविद्यालय के प्राचार्य डा. शशिकांत राय ने कहा कि स्वामी जी एक कुशल सामाजिक कार्यकर्ता, महान दार्शनिक और यशस्वी वक्ता थे। महाविद्यालय की प्रबंध समिति के संयुक्त सचिव नीरज राय ने कहा कि
स्वामी जी का प्रारंभिक नाम नौरंग राय था। डा. देवप्रकाश राय ने कहा कि स्वामी जी के धार्मिक विचार भौतिक और वैज्ञानिक थे। इस मौके पर डा. विलोप सिंह, ओमप्रकाश राय, राधेश्याम, सत्येंद्रबहादुर राय, शशांकशेखर राय आदि उपस्थित थे। संचालन डा. सुजीत कुमार ने किया।