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पूर्व सैनिकों का दर्द : सम्मान भी चाहिए, सुविधाएं भी

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गहमर गांव के पूर्व सैनिक सेवा समिति की कार्यालय में अमर उजाला फाउंडेशन के संवाद कार्यक्रम में श
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गहमर। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले सैनिकों और बलिदानियों का सम्मान केवल समारोहों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके नाम नई पीढ़ी की स्मृतियों में भी दर्ज होने चाहिए। इसी सोच के साथ शुक्रवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से पूर्व सैनिक सेवा समिति, गहमर के कार्यालय परिसर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों ने सैनिक सम्मान, युवाओं के भविष्य और पूर्व सैनिकों की सुविधाओं से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए।
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करीब 1.5 लाख की आबादी वाले एशिया के सबसे बड़े गांव में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष कैप्टन धनंजय सिंह ने की। संवाद के दौरान पूर्व सैनिकों ने कहा कि बलिदानी सैनिकों के नाम पर सरकारी स्कूल, कॉलेज, सभागार, संस्थान और सड़कों का नाम रखा जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी उनके त्याग और बलिदान से प्रेरणा ले सके। उनका कहना था कि गहमर जैसे सैन्य बाहुल्य गांव, जहां आज भी करीब 15 हजार सैनिक देश के विभिन्न हिस्सों में सेवाएं दे रहे हैं और लगभग इतने ही पूर्व सैनिक निवास कर रहे हैं, वहां सैनिक परिवारों के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव चिंता का विषय है।

पूर्व सैनिकों ने गहमर में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना, रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव, स्कूल-कॉलेजों में एनसीसी इकाइयों के विस्तार तथा गांव के प्रमुख स्थलों पर युद्ध ट्रॉफी, टैंक और अन्य सैन्य प्रतीकों की स्थापना की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं में सेना के प्रति आकर्षण बढ़ेगा और भर्ती की तैयारी को भी नई दिशा मिलेगी।
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संवाद में पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए कैंटीन सुविधा, जिले में ईसीएचएस की चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत करने तथा गांव की जलनिकासी की समस्या के स्थायी समाधान की भी मांग की गई। कार्यक्रम में कैप्टन धनंजय सिंह, कैप्टन मनोज सिंह, लेफ्टिनेंट मिथलेश कुमार सिंह, सूबेदार मेजर बब्बन सिंह, नायब सूबेदार विश्वामित्र सिंह, एसआई सच्चिदानंद उपाध्याय, हेमंत उपाध्याय, संरक्षक रामकुमार सिंह और मीडिया प्रभारी बिहारी लाल वर्मा सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक मौजूद रहे।
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