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जोर नहीं पकड़ रही परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प करने की योजना

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परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प करने की सरकार की योजना विभागीय हिलाहवाली के चलते परवान नहीं चढ़ पा रही है। विद्यालयों में बुनियादी सुविधा से लैस करना है। विभाग के मुताबिक इन पैरामीटर पर महज 2269 के सापेक्ष दो सौ विद्यालय ही कायाकल्प योजना से संतृप्त हुए हैं। परिषदीय विद्यालयों को मूलभूत सुविधाओं से लैस करते हुए उन्हें चौदह पैरामीटर्स पर संतृप्त करना है। इसके तहत शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिका शौचालय, दिव्यांग शौचालय, रसोईघर का टाइल्सकरण, कक्षों के फर्श का टाइल्सकरण, परिसर में दिव्यांग सुलभ रैंप एवं रेलिंग, विद्यालय का विद्युत संयोजन, शौचालय, मूत्रालय में नल-जल आपूर्ति, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, विद्यालय की रंगाई-पुताई, कक्षों में उपयुक्त वायरिंग आदि शामिल है। जिले में 2269 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। इनमें 1468 प्राथमिक, 352 उच्च प्राथमिक तथा 449 कंपोजिट विद्यालय हैं। इन विद्यालयों में दो लाख 80 हजार 26 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। शेष ज्यादातर विद्यालयों में करीब पांच-छह पैरामीटर्स पर कार्य होना बाकी है। इस संबंध में जिला समन्वयक निर्माण शमशेर आलम ने बताया कि दो सौ विद्यालयों को निर्धारित चौदह पैरामीटर्स पर कार्य कराकर संतृप्त कर दिया गया है। शेष में कार्य की गति में जल्द ही तेजी आ जाएगी।
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