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Ghazipur News: पूर्वांचल का इकलौता मैदान जिसने देश को दिए दो हॉकी ओलंपियन

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गाजीपुर। यह कहानी है करमपुर के मेघबरन सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम की। यह पूर्वांचल का इकलौता मैदान है जिसने देश को दो-दो हॉकी ओलंपियन दिए हैं। इतना ही नहीं इस स्टेडियम के 14 से अधिक प्रशिक्षु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने खेल का जलवा बिखेर चुके हैं। फिलवक्त 50 से अधिक खिलाड़ी देश की अलग-अलग टीमों का हिस्सा हैं।
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देश में इस गांव की पहचान हॉकी नर्सरी के रूप में बन गई है। पंजाब के संसारपुर के हॉकी स्टेडियम के बाद करमपुर का मेघबरन सिंह स्पोटर्स स्टेडियम हॉकी खिलाड़ियों की नई पौध तैयार करने के रूप में जाना जा रहा है। हालिया संपन्न पेरिस ओलंपिक में इस स्टेडियम के दो प्रशिक्षु ललित कुमार उपाध्याय और राजकुमार पाल कांस्य पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम का हिस्सा रहे।
तीन हजार की आबादी वाले इस गांव में शायद ही कोई घर ऐसा होगा जिस घर के बच्चे हॉकी स्टिक पकड़ना न जानते हो। क्योंकि इस गांव के युवाओं के लिए हॉकी सिर्फ खेल नहीं, उनके जीवन का ही हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलते ही गांव के बच्चे स्टेडियम में आ जाते हैैं। आज लोग जितना इस स्टेडियम के बारे में जानना चाहते, उतना ही इस स्टेडियम के संस्थापक रहे स्वर्गीय तेज बहादुर सिंह के बारे में जानना चाहते हैं। जिन्होंने बचपन में पढ़ाई में कम रुचि के कारण छोटी सी ही उम्र में घर का भार अपने कंधों पर ले लिया।
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स्टेडियम के संचालक अनिकेत सिंह बताते हैं कि स्वर्गीय तेज बहादुर सिंह शुरुआत में कुश्ती करते थे। लेकिन, वर्ष 1980 में भारतीय हॉकी टीम की ओलंपिक में स्वर्ण पदक के बारे में सुन-सुनकर वे अपने पूरे बचपन एवं युवावस्था भर गौरवान्वित महसूस करते थे। इसके बाद भारतीय टीम का लगातार निराशाजनक प्रदर्शन उनको लगातार व्यथित करता था। 1983 में भारतीय क्रिकेट टीम के विश्व कप जीतने के उपरांत हॉकी की गिरती लोकप्रियता ने उन्हें पूरी तरह विचलित कर दिया। उन्होंने तभी यह तय कर लिया की वह अपना पूरा जीवन हॉकी को समर्पित कर देंगे और गांव में ही एक ऐसी टीम का गठन करेंगे जहां के खिलाड़ी भारतीय टीम के लिए खेलेंगे और ओलंपिक में स्वर्ण जीतकर राष्ट्र का गौरव बढ़ाएंगे। इसी दृढ़ निश्चय को लेकर उन्होंने वर्ष 1983 में गांव के बच्चों और युवाओं को हॉकी खिलवाना शुरू किया। हालांकि इस स्टेडियम में कुश्ती और ताइक्वांडो के भी खिलाड़ी तैयार किए जाते हैं, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों ने 20 मेडल जीता है।


आसान नहीं थे शुरुआती दिन, लोग पूछते थे सवाल
मेघबरन सिंह स्टेडियम के प्रबंधक व गाजीपुर के पूर्व सांसद राधेमोहन सिंह बताते हैं कि खिलाड़ियों के परिजनों का एक सवाल होता था कि अगर उनके बच्चे ऐसे खेलेंगे तो उनके बच्चों का भविष्य क्या होगा। यदि वे असफल हो गए तो उनके नौकरी और परिवार का क्या होगा। ऐसे में ठाकुर तेज बहादुर सिंह को समझाने के लिए बहुत कोशिशें करनी पड़ी थी और उन्होंने निर्णय लिया की गांव के बच्चों को देश के विभिन्न हिस्सों के हॉस्टल और एकेडमी में भेजा जाए, ताकि उनकी नौकरी लग सके। अपने सबसे अच्छे खिलाड़ियों को हॉकी एकेडमी की भर्ती में भेजना शुरू कर दिए। धीरे-धीरे बड़ी संख्या में खिलाड़ी देश की विभिन्न टीमों में भर्ती होना शुरू हो गए। वहां से खिलाड़ियों को जॉब भी आफर होने लगे।
खिलाड़ियों के लिए गाय-भैंस तक खरीदनी पड़ी
अनिकेत सिंह बताते हैं कि शुरुआत में जब करमपुर की टीम प्रदेश स्तर पर भी अपना नाम बनाना शुरू कर दी थी। लेकिन, गांव के बच्चों की खराब आहार/ डाइट खान पान की वजह से पीछे रह जाते। इस परेशानी से पार पाने के लिए तेजू सिंह ने बड़ी संख्या में गाय एवं भैंस खरीदी, जिससे खिलाड़ियों की डाइट बेहतर हो सके। हर खिलाड़ी को खेल के बाद दूध- चना एवं अन्य पौष्टिक आहार देने लगे, जिससे उनकी फिटनेस में सुधार होने लगा। अब अकादमी के खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में अपनी छाप छोड़ने लगे। हॉकी में नाम होने लगा तो खेल मैदान को स्टेडियम में तब्दील करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। 2016 में यहां एस्ट्रोटर्फ की सुविधा उपलब्ध कराई गई। नतीजा यह हुआ कि इस स्टेडियम से ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल जैसे खिलाड़ी चमके और ओलंपिक तक का सफर तय किया। इतना ही नहीं विश्व विजेता भारतीय जूनियर हॉकी टीम के सदस्य अजीत पांडेय भी इस अकादमी से जुड़े रहे हैं। स्टेडियम की उपलब्धियों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्टेडियम के विस्तार के लिए पांच करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।

राष्ट्रीय टीम का ये रहे हिस्सा : ललित उपाध्याय, राजकुमार पाल, उत्तम सिंह, अजित पांडेय, पवन राजभर, संजय यादव, जमीला बानो, विनोद सिंह, शशिकांत राजभर, राहुल राजभर, अंशु मौर्य, अजित यादव, करिश्मा सिंह।
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