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Ghazipur News: रात में नहीं जलानी थी लाइट, मुश्किल से घर पर हो रही थी बात

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मणिपुर से लौटे छात्रों में सुनाया हिंसाग्रस्त क्षेत्र का हाल, दिया सरकार को दिल से धन्यवाद
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राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय में तीनों छात्र कर रहे थे पढ़ाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गाजीपुर। रात में हॉस्टल की लाइट नहीं जलानी थी। बड़ी मुश्किल से घर पर बात हो पा रही थी। खाने- पीने का जो सामान बचा था, इससे ही किसी तरह काम चल रहा था। सिर्फ गोलियों की तड़तड़ाहट और बम फूटने की आवाज ही गूंज रही थी। अब भी उस माहौल को याद का रोंगटे खड़े हो रहे हैं। बस ईश्वर से यहीं प्रार्थना कर रहा था कि इस मुश्किल घड़ी में किसी तरह यहां से निकलकर घर पहुंच जाऊं। इंडियन आर्मी जब हॉस्टल पहुंची और सुरक्षित निकालकर एयरपोर्ट तक लाया तो लगा कि भगवान ने बात सुन ली और देवदूतों को भेज दिया। प्रदेश सरकार का दिल से धन्यवाद है, आज सुरक्षित घर पहुंच रहा हूं। यह कहना था मणिपुर में भड़की हिंसा में फंसे छात्र सत्येंद्र गौतम का।
मरदह थाना के मेहंगवा निवासी सत्येंद्र गौतम ने बताया कि वह 2018 में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने आए थे। यहां से वह स्पोर्टस कोचिंग में एमसी कर रहे हैं। बताया कि इम्फाल में स्थितियां तो कुछ हद तक सामान्य हैं, लेकिन मणिपुर में स्थितियां ठीक नहीं हैं। बीते तीन मई की रात अचानक बम फूटने और गोलियों की तड़तड़ाहट की आवाज सुनाई दी तो कुछ समझ में नहीं आया।
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लेकिन दूसरे दिन हिंसा की जानकारी मिली। स्थितियां पांच दिन में भयावह हो उठी। नेट की सुविधा कट गई थी। ऐसे में अब नेटवर्क इतना व्यस्त रहता था कि 10 से 15 बार कॉल करने पर फोन लगता था। बीते नौ मई को जब इंडियन आर्मी हॉस्टल पहुंची तो उम्मीद जगी।
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बीपीईएस की पढ़ाई कर रहे दूसरे वर्ष के छात्र संतोष मौर्या और सुनीत यादव को भी एयरपोर्ट लाया गया। वहां से तीनों छात्र दिल्ली लाए गए। जहां प्रदेश सरकार के अधिकारी मौजूद थे। वहां से हम तीनों लोगों को दिल्ली स्थित यूपी भवन लाया गया, जहां एक दिन रूकने के बाद वाहन से लखनऊ छोड़ा गया। इसके बाद लखनऊ से सभी को अलग-अलग वाहनों से घर भेजा गया। उन्होंने बताया कि अभी भी जनपद के तीन छात्र और हैं, जिन्हें भी लाने का क्रम जारी है।
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