भीमापार। क्षेत्र की शारदा सहायक नहर के खंड-23 लालगंज राजवाहा में पानी नहीं आने से क्षेत्र के किसानों के सूख रहे हैं। इसके चलते पानी के अभाव में किसान धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे हैं। आजमगढ़ के ठेकमा के बरदह से निकलकर ये नहर सैदपुर के गौरा गांव के अंतिम टेल तक करीब 71 किलोमीटर तक का सफर तय करते आती है। स्थिति ये है कि आजमगढ़ जिले के अंतिम गांव रामपुर तक तो इस नहर में पानी आता है लेकिन जैसे ही ये नहर गाजीपुर की सीमा में प्रवेश करती है तो इसमें पानी नहीं रहता है। जिले में करीब 15 से 20 किमी तक के दायरे में नहर से जुड़े हजारों बीघा खेत सूख जाते हैं। सिंचाई के अभाव में आर्थिक रुप से कमजोर किसानों के खेतों की सिंचाई नहीं हो पाती है।
मालूम हो कि ये नहर वर्ष 1960 से 1970 के दशक में बनाई गई थी। क्षेत्र के खिदिरपुर, मलौरा, कुआंटी, कबुलहा, नाथूराम, मंगारी, दलीपराय पट्टी, मथुरा, बिजरवां, मखदूमपुर, जगदीशपुर, गौरा आदि दर्जनों गांव तक लाई गई इस नहर के चलते क्षेत्र में एक भी सरकारी नलकूप नहीं लगाए गए। संपन्न किसान तो निजी नलकूप के सहारे खेती कर लेते हैं, लेकिन गरीब किसान नहर के पानी की आस लगाए बैठे रहते हैं। उनकी फसल पानी के अभाव में हर वर्ष बर्बाद हो जाती है। धान की खेती पूरी तरह से बरसात के पानी पर निर्भर होती है। बरसात होने पर थोड़ी बहुत धान की खेती हो जाती है और यही हाल गेहूं की फसल की है। क्षेत्र के किसानों की तरफ से जनप्रतिनिधियों को अवगत कराने के बाद भी वो अनसुना करते रहते हैं। क्षेत्र के किसान राजीव कुमार सिंह, रविन्द्र सिंह, अरविंद सिंह, भोरिक राजभर, अजय सिंह,ने बताया कि सफाई की खानापूर्ति करके रुपयों की बंदरबांट कर ली जाती है।
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नहर लखीमपुर से खुल गई है। पानी पहुंचने में 15 दिन लग जाएंगे। पानी आ जाने पर टेल तक पहुंचाया जाएगा।- बिरेन्द्र सिंह, अधिशासी अभियंता शारदा सहायक