शहर का गंदा पानी और सेप्टिक टैंक से निकलने वाली गंदगी को साफ करने के लिए जमुना देवा में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) निर्माण का काम शुरू हो गया है। कार्यदायी संस्था जल निगम की गंगा प्रदूषण नियंत्रण ईकाई वाराणसी के मुताबिक, इस साल 10 अप्रैल को काम शुरू हुआ। जिसे 21 महीने में 9 जनवरी 2024 तक पूरा कर लिया जाएगा। पिछले तीन महीने में 152 करोड़ रुपये के एसटीपी के निर्माण का करीब 10 फीसदी काम हो गया है।
एसटीपी शहर की बहुप्रतिक्षित परियोजना है। इसके चालू होने के बाद रोजाना शहर के 21 मिलियन लीटर गंदे पानी को साफ किया जाएगा। साथ ही कोर ट्रीटमेंट प्लांट में नगर पालिका की ओर से सेप्टिक टैंक से निकाले जाने वाली गंदगी को भी ट्रीटमेंट किया जा सकेगा। एसटीपी से निकलने वाले साफ पानी को जमुना देवा के नजदीक बहने वाली बेसो नदी में प्रवाहित कर दिया जाएगा। इसके अलावा इस पानी को सिंचाई के उपयोग में भी लाया जा सकता है।
एसटीपी निर्माण के लिए दो हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराई गई है। जिसमें विभिन्न चैंबरों का निर्माण करने के साथ मशीनों को लगाया जाएगा। जल निगम के अधिकारियों ने बताया कि यहां गंदे पानी का शोधन एसबीआर तकनीक से होगा। जिसमें बहुत ही कम मात्रा में क्लोरीन का प्रयोग किया जाता है। मशीनों और चैंबरों की मदद से गंदे पानी का शोधन होगा। जिससे पानी में रसायन की मात्रा बेहद कम होगी। वहीं, पूरे शहर के गंदे पानी को इक्ट्ठा करने के लिए गोरा बाजार में मेन पंपिंग स्टेशन का भी काम शुरू हो गया है। जहां सीवर पाइप लाइनों से आने वाले पानी को इक्ट्ठा किया जाएगा। इसी पानी को यहां से एसटीपी में भेजा जाएगा। जिसके बाद शोधन का कार्य होगा।
सीवर लाइन बनने के बाद 23 नाले बंद हो जाएंगे बंद
शहर में इस समय कुल 23 नाले हैं जिनका मुंह सीधे गंगा में खुलता है। जिससे हजारों लीटर शहर का गंदा पानी गंगा में प्रवाहित होता है। सीवर लाइन का काम होने के बाद ये नाले बंद हो जाएंगे जिससे शहर गंदगी से रहित होने के साथ गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने में मदद मिलेगी। इस समय शहर के गंदे पानी को पंपिंग स्टेशन तक पहुंचाने के लिए फेज-1 और फेज-2 में सीवर लाइन का काम चल रहा है। कार्यदायी संस्था के मुताबिक 70 फीसदी काम हो गया है।
15 साल तक कार्यदायी संस्था करेगी मरम्मत
कार्यदायी संस्था जल निगम की गंगा प्रदूषण नियंत्रण ईकाई वाराणसी के पास ही 15 साल तक एसटीपी को मरम्मत करने का जिम्मा होगा। वहीं, एसटीपी का काम महीनों से लटका पड़ा था। पिछले दिनों निर्माण को लेकर 14 करोड़ रुपये लागत बढ़ी है। जिसके बाद एसटीपी निर्माण की पूरी लागत 152 करोड़ रुपये हो गई है।
बड़े प्रयास के बाद जनपद में एसटीपी का निर्माण कार्य शुरू हुआ है। जनवरी 2024 में काम पूरा होने के बाद शहर के 23 नाले तत्काल बंद हो जाएंगे। साथ ही सीवेज बेहतर प्रणाली से जुड़ जाएंगे। इससे शहर प्रदूषण रहित होने के साथ गंगा की धारा निर्मल हो जाएगा।
एम पी सिंह, जिलाधिकारी।