गाजीपुर। शारदीय नवरात्र आज से शुरू हो रहे हैं। नौ दिनों तक चलने वाली शक्ति की आराधना, व्रत और पूजन-अर्चन की तैयारियां रविवार की देर शाम तक चलतीं रहीं। नवरात्र के पहले दिन शहर तथा ग्रामीण क्षेत्रों के दुर्गा मंदिरों पर जहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ेगी वहीं अधिकांश घरों में कलश की स्थापना होगी। नवरात्र को लेकर देवी भक्तों में उत्साह चरम पर है। शारदीय नवरात्र पर गहमर स्थित मां कामाख्या धाम, करीमुद्दीनपुर स्थित मां कष्टहरणी देवी, दिलदारनगर स्थित सायर माई, रेवतीपुर स्थित मां भगवती देवी, बहादुरगंज स्थित मां चंडी धाम, सैदपुर स्थित काली मंदिर, मुहम्मदाबाद स्थित मनोकामना देवी सहित जिले के अन्य प्रसिद्ध देवी मंदिरों में भक्त दर्शन-पूजन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।
हाथी पर सवार देवी लाएंगी सुख और संपन्नता
गाजीपुर । शारदीय नवरात्र के नौ दिन देवी शक्ति के विभिन्न रूपों की पूजा होती है। अधिष्ठात्री देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना के साथ पहले दिन कलश स्थापना और व्रत का विधान है। आज से शुरू शारदीय नवरात्र पांच अक्टूबर तक चलेगा। अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन और दशमी पर कलश और प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।
इस बार मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। यानी इस बार मां दुर्गा का वाहन हाथी है। बता दें कि रविवार और सोमवार से जब नवरात्र प्रारंभ होते हैं तो माता का वाहन हाथी होता है। देवी के हाथी पर सवार होने का मतलब है सर्वत्र सुख संपन्नता बढ़ेगी। विश्व में शांति के प्रयास सफल होंगे।
इस बार नवरात्र प्रारंभ 26 सितंबर को सुबह 3 बजकर 24 मिनट से होगा। वहीं प्रतिपदा तिथि की समाप्ति 27 सितंबर की सुबह 03 बजकर 08 मिनट पर होगी। घट स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त 26 सितंबर को सुबह 06:20 से सुबह10 :19 तक है। इस दिन अभिजित मुहूर्त सुबह 11:54 मिनट से 12 : 42 तक रहेगा।
इस प्रकार करें कलश की स्थापना
ज्योतिषाचार्य नीतेश मिश्रा ने बताया कि पूजा के स्थान को गंगाजल डालकर उसकी शुद्धि कर लें। घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें। मां दुर्गा का गंगा जल से अभिषेक करें। मां को अक्षत, सिन्दूर और लाल पुष्प अर्पित करें, प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाएं। धूप और दीपक जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करें और फिर मां की आरती करें। मां को भोग भी लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।