बारा। बारिश में नदियों का जलस्तर मापने के लिए अब मीटर गेज की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसे नई तकनीक वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम से मापा जाएगा। सेंसर युक्त इस नए उपकरण से नदियों के जलस्तर के साथ ही रेलवे ट्रैक की पूरी जानकारी मिल सकेगी। सिस्टम से जुड़े अधिकारियों के मोबाइल पर अलर्ट एसएमएस भी आता रहेगा। रेलवे ने कर्मनाशा पुल पर इस सिस्टम का सफल ट्रायल किया था। अब पूर्व मध्य रेलवे के 57 पुलों पर नदियों के जलस्तर की निगरानी के लिए इसे लगाया गया है।
रेलकर्मी अभी तक नदियों का जलस्तर पारंपरिक गेज पद्धति से ही मापते रहे हैं। भारी बारिश और बाढ़ के समय मौके पर पहुंच कर जलस्तर मापना कठिन और असुरक्षित होता था। सूचनाएं देर से मिलती थीं और खतरे को भांपना मुश्किल था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। आधुनिक वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम के इस्तेमाल से नदियों पर पुलों की निगरानी आसान हो जाएगी।
इस तरह काम करता है सिस्टम
बारा। सेंसर युक्त यह सिस्टम सौर ऊर्जा से संचालित है। यह ट्रैक मैनेजमेंट से जुड़ा होता है। इसमें एक चिप लगी रहती है। उसमें पुल से संबद्ध सहायक मंडल इंजीनियर, कार्य निरीक्षक और रेल पथ निरीक्षक आदि के मोबाइल नंबर फीड रहते हैं। पुल पर जलस्तर बताने वाले स्केलर को सेंसर सिस्टम रीड करता है। जब जलस्तर खतरे के निशान से घटता या बढ़ता है तो इंजीनियरों व अधिकारियों को एसएमएस मिलने लगता है। इससे अधिकारी सतर्क हो जाएंगे और ट्रेनों का सुरक्षित परिचालन हो सकेगा। वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम खराब मौसम और रात के लिए उपयुक्त है।
दानापुर-पीडीडीयू मंडल सहित पांच मंडलों में कुल 57 रेलवे पुलों पर यह सिस्टम लगा दिया गया है। कर्मनाशा नदी के जलस्तर की निगरानी के लिए भी पुल संख्या 695 पर इसे ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से जोड़ दिया गया है। -सरस्वती चंद्र, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पूर्व मध्य रेलवे