उप्र बार कौंसिल के आह्वान पर विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को सिविल एवं कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहेे। उनका कहना था कि प्रदेश सरकार अधिवक्ताओं के हितों की अनदेखी कर रही है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि शीघ्र ही मांगें पूरी नहीं की गईं तो अधिवक्ता तीन मार्च को न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए प्रदेश सरकार का पुतला फूकेंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के तहत शुक्रवार को कलेक्ट्रेट एवं सिविल बार के अधिवक्ता सुबह दस बजे से ही लामबंद होने लगे। इसके बाद अधिवक्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू किया। सभा को संबोधित करते हुए कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चिरायु प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने वादों से मुकर रही है।
अधिवक्ताओं की मृत्यु पर 50 हजार के स्थान पर पांच लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। पूर्व सरकार की पेंशन योजना का भी यही हश्र है। यदि इन्हें जल्द ही बहाल नहीं किया गया तो अधिवक्ता हक की लड़ाई लडे़ंगे। वहीं सिविल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ओमप्रकाश वर्मा ने भी प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अधिवक्ताओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो अधिवक्ता 27 फरवरी को भी न्यायिक कार्य से विरत रहते हुए मांगों के संबंध में जिलाधिकारी को पत्रक सौंपेंगे। इस मौके पर अहमद जमाल जैदी, वनबिहारी सिंह, हवलदार सिंह, श्रीकांत तिवारी, वासुदेव चौबे, दशरथ सिंह यादव, प्रभु नारायण यादव आदि मौजूद थे। इसी तरह जमानिया, मोहम्मदाबाद, जखनिया तथा सैदपुर में भी अधिवक्ता न्यायिक कार्यों से विरत रहते हुए प्रदेश सरकार के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई।