धान की अच्छी उपज पाने के लिए किसानों को तकनीकी ढंग से खेती करनी होगी। मृृदा परीक्षण के बाद जरूरत के हिसाब से उर्वरक का इस्तेमाल करें। आरटीआई सभागार में शुक्रवार को कृषि विभाग की ओर से आयोजित गोष्ठी में
कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को उक्त सुझाव दिए। गोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रभारी जिलाधिकारी मुरलीधर मिश्र थे। उन्होंने कहा कि जिले के 50 गांवों में रबी फसल का 270 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी
गई है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. डीके सिंह ने मृदा और उर्वरता के बारे में विस्तृत जानकारी दी। मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह ने मृदा परीक्षण की सलाह दी। कहा कि मृदा परीक्षण के लिए एक तिहाई
ग्राम सभाओं का चयन किया गया है। लघु सीमांत एवं बृहद किसानों का चयन कर उनसे मृदा नमूना लिया जाएगा। मृदा का परीक्षण करने के बाद किसानों को मृदा स्वास्थ्य हेल्थ कार्ड दिया जाएगा। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक
डा. आरपी सिंह ने बीज एवं भूमि शोधन और खरीफ में लगने वाले धान के कीट की जानकारी दी। उप कृषि निदेशक यूपी सिंह ने खरीफ उत्पादन की रणनीति के बारे में जिलाधिकारी को अवगत कराया। कृषि निवेश आपूर्ति एवं फसल
बीमा की चर्चा करते हुए कृषि अधिकारी अशोक प्रजापति ने कहा कि जिले के सहकारी समितियों पर कुल 13348 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डा. एसके सिंह ने कहा कि मौसम विभाग ने 12 से 15
प्रतिशत वर्षा कम होने सूचना दी है। ऐसी स्थिति में कम समय में अधिक उत्पादकता वाले धान की प्रजापतियों का चयन करना चाहिए। वहीं देवकली पम्प कैनाल के अधिशासी अभियंता ने कहा कि पम्प कैनाल को समय से चालू करा दिया
गया। जमानिया पम्प कैनाल पक्की होने के कारण चालू करने में विलंब हो रहा है तथा सभी नहरों में पानी पहुंच गया है। मुख्य विकास अधिकारी एके पांडेय ने खरीफ और रबी गोष्ठी का उद्देश्य बताते हुए कहा कि गोष्ठी के आयोजन से
किसानों की समस्याओं की जानकारी एवं उनके समाधान का रास्ता निकाला जाता है। उन्होंने खरीफ में पानी की कमी को देखते हुए दलहन बुआई पर जोर दिया। संचालन दीप नारायण राय ने किया।