विधानसभा चुनाव की तैयारियों के तहत मतदेय स्थलों (पोलिंग बूथों) के युक्तिकरण और संभावित पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी क्रम में बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी अनुपम शुक्ला की अध्यक्षता में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक हुई। इसमें मतदेय स्थलों के संभावित बदलावों पर चर्चा करते हुए राजनीतिक दलों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गईं।
जिलाधिकारी ने कहा कि मतदेय स्थलों के संभावाजन की पूरी प्रक्रिया निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के अनुरूप पारदर्शी और त्रुटिहीन तरीके से पूरी की जाएगी। नए मतदेय स्थलों के निर्धारण में मतदाताओं की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता होगी, ताकि किसी भी मतदाता को मतदान केंद्र तक पहुंचने में अनावश्यक दूरी तय न करनी पड़े।
बैठक में जिला निर्वाचन अधिकारी ने सत्यापन के बाद तैयार की गई संभावित परिवर्तनों की सूची राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि सूची का गहन परीक्षण कर यदि कहीं भवन की जर्जर स्थिति, दूरी या अन्य कोई विसंगति दिखाई दे तो उसकी सूचना प्रशासन को उपलब्ध कराएं। बैठक में बताया गया कि चार जुलाई को मतदेय स्थलों की प्रारूप सूची प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 11 जुलाई तक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित पक्ष उप जिला निर्वाचन अधिकारी अथवा जिला निर्वाचन कार्यालय में अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
बैठक के दौरान समाजवादी पार्टी के जिला सचिव राजेश यादव ने सुझाव दिया कि जिन विद्यालयों में छात्रों की संख्या कम होने के कारण शिक्षण कार्य बंद हो गया है, लेकिन भवन सुरक्षित है और वहां पहले से मतदेय स्थल संचालित होता रहा है, ऐसे केंद्रों को अनावश्यक रूप से परिवर्तित न किया जाए। इस पर जिलाधिकारी ने सभी उपजिलाधिकारियों को सुझाव पर विचार करने के निर्देश दिए। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)/उप जिला निर्वाचन अधिकारी वेद सिंह चौहान, सभी उपजिलाधिकारी, भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों सहित निर्वाचन कार्यालय के अधिकारी मौजूद रहे।