सेमरा गांव के पूरब क्षेत्र में इस वर्ष सबसे ज्यादा कटान हुआ है। इसके अलावा गांव को बचाने के लिए बने ठोकर का 50 मीटर से भी अधिक हिस्सा पानी में बह गया है। ग्रामवासियों के हो-हल्ला मचाने पर विभाग की ओर से बांस-बल्ली एवं मिट्टी से भरी बोरियां डालकर उसे बचाने की कवायद की जा रही है। इस वर्ष कटान में लगभग 15 एकड़ से अधिक कृषि योग्य भूमि गंगा में समा गई। ठोकर के कुछ भाग के बह जाने से गांववासी काफी चिंतित है। गंगा का जलस्तर दो बार बढ़ने और घटने से काफी कटान हुआ है। बाढ़ का खतरा पूरे सितंबर माह तक बना हुआ है। गांव के लोगों का कहना है कि बाढ़ आने से लोगों का नुकसान नहीं होता है। लेकिन जब पानी घटना शुरू होता और उसी समय हवा तेज चली तो कटान भी तेजी से होना निश्चित है। जिन लोगों की भूमि कटान में गई उनमें जयमंगल पटेल, प्रद्युम्न यादव, मोती चंद पटेल, काशीनाथ पटेल, तुलसी पटेल आदि शामिल हैं।