अवसर पर सभा में वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार ने पूर्व सरकार में स्वीकृत विश्वकर्मा पूजनोत्सव की छुट्टी यह कहकर समाप्त कर दिया कि महापुरुषों के जन्मदिन की छुट्टियां खत्म की जा रही हैं। महासभा सरकार को अवगत कराना चाहता है कि भगवान विश्वकर्मा महापुरुष नहीं थे, वह आदि शिल्पी और निर्माणों के देवता थे।
धरना सभा में प्रदेश सचिव हरेंद्र विश्वकर्मा ने भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि यह सरकार जनता की आशा-आकांक्षाओं के अनुरूप काम नहीं कर रही है। अपने वादों को पूरा करने में विफल रही है। सड़कों को गड्ढामुक्त करने का फरमान जारी किया गया, लेकिन जिले की सड़कें एकदम खराब है। उन पर पैदल चलना कठिन हो गया है। जिलाध्यक्ष रामअवतार विश्वकर्मा ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने पूजनोत्सव की सार्वजनिक छुट्टी बहाल नहीं की तो संगठन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। सरकार समाज के मान-सम्मान को ठेंस पहुंच रही है। समाज की पहचान मिटाने की कुचक्र रच रही है। अंत में मुख्यमंत्री को संबोधित पत्रक जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित किया गया।
धरना में जनार्दन विश्वकर्मा, डा. प्रमोद विश्वकर्मा, बुच्चन लाल, उर्मिला, तुलसी, चंद्रमा, अभयनारायण, किशन प्रसाद, रमाशंकर, शिववचन, रामचंदर, विनय, जवाहिर, पार्वती, शिवम, जयप्रकाश, मेवालाल, सीताराम, लालमन आदि ने विचार व्यक्त किया। संचालन कन्हैयालाल विश्वकर्मा ने किया।