लाल दरवाजा स्थित पावर हाउस पर कामकाज ठप कर धरना-प्रदर्शन करते विद्युत कर्मचारी व अधिकारी।
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गाजीपुर। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को निजी हाथों में सौंपे जाने के विरोध में सोमवार से शुरू बिजली कर्मियों की बेमियादी हड़ताल का असर शहरी क्षेत्र से लेकर ग्रामीण इलाकों में दिखने लगा है। पुलिस-प्रशासन की तमाम कवायदों के बावजूद बत्ती गुल रही। बिजली न रहने से लोग उमर भरी गर्मी में बिलबिला उठे। जबकि पानी के लिए भी तरसना पड़ा। पानी आपूर्ति भी नहीं होने से लोग पानी के लिए इधर से उधर भटकते रहे। उधर, बिजलीकर्मियों कार्य बहिष्कार किया और सभा में निजीकरण के विरोध में नारेबाजी की। बिजली न होने से भारी उमस, गर्मी से लोग परेशान हैं। कई इलाकों में पेयजल संकट को लेकर हा-हाकार की स्थिति बन गयी है। दर्जनों गांवों में बिजली न होने के चलते नलकूप ठप हो गये। लोगों के इनवर्टर भी जवाब देने लगे। बिजली नहीं रहने से पूरा जन जीवन असामान्य रहा। मोबाइल चार्ज नहीं होने तथा नेटवर्क की समस्या से लोगों का काम काज भी प्रभावित हुआ। इधर जिले भर के उपकेंद्रों तथा फीडरों पर कर्मचारी तथा अधिकारी विभाग के निजीकरण के खिलाफ धरना प्रदर्शन करते रहे। हालांकि जिला प्रशासन की ओर से बिजली आपूर्ति शुरु कराने के लेकर थोड़ी बहुत कवायद की गई लेकिन कोई नतीजा नही दिखा। गाजीपुर में समस्त अभियंता अवर अभियंता, कर्मचारीगण एवं संविदा,निविदा कर्मियों,मीटर रीडरों ने पूर्ण कार्य बहिष्कार किया। लालदरवाजा स्थित पावर हाऊस पर सभा को संबोधित करते हुए जिला संयोजक निर्भयनारायण सिंह ने कहा कि ऊर्जा प्रबंधन एवं प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ऊर्जा विभाग के कर्मीको के आवाज को नजरअंदाज करते हुए कार्मिकों को लगातार अनिश्चितकालीन हड़ताल एवं जेल भरो आंदोलन के लिए विवश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संविदाकर्मियों को प्रशासन ने सब स्टेशन पर लाइट लगाने को मजबूर किया तो जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा। जूनियर इंजीनियर संगठन के पूर्वांचल अध्यक्ष इंजीनियर शत्रुघन यादव ने बताया कि ऊर्जा विभाग का निजीकरण किसी भी रूप में उपभोक्ताओं, कार्मिकों के हित में नहीं है। अधिशासी अभियंता इंजीनियर आदित्य पांडेय, मनीष कुमार, सह संयोजक इंजीनियर शिवम राय समेत अन्य उपकेंद्रों पर कर्मचारी मौजूद रहे।