परिषदीय विद्यालयों के शैक्षिक सत्र का दूसरा चरण शुरू होते ही कॉपी-किताबों की बिक्री शुरू हो गई है। बीते वर्ष की अपेक्षा कापी-किताबों की दरों में पांच से दस प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है। इसी तरह स्कूल बैग, लंच बॉक्स एवं पानी की बोतल आदि के मूल्य में भी पहले की तुलना में काफी बढ़ गए हैं।
गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष कापी और किताबों के दाम में वृद्धि तो हुई है लेकिन यह इजाफा कॉंवेंट स्कूलों में चलने वाली किताबों पर ज्यादा है। किताबों के दाम बढ़ने का सीधा असर अभिभावकों की जेब पर पड़ रहा है। सरकारी स्कूलों में जहां करीब पांच प्रतिशत की वृद्धि हुई है वहीं निजी माध्यमिक स्कूलों में कॉपी-किताबों की दर में पांच से दस फीसदी का इजाफा हुआ है। इसके अलावा स्कूल बैग, लंच बाक्स, पानी की बोतल में जहां कुछ ज्यादा वृद्धि हुई है वहीं पेन-पेंसिल, रबर, कटर के दाम में मामूली वृद्धि हुई है। विभिन्न प्रकार की कापियों की कीमत में तो इजाफा नहीं हुआ है लेकिन इनके पन्ने घटा दिए गए हैं।
स्टेशनरी विक्रेता आशीष का कहना है कि सीबीएसई की पुस्तकों की कीमत पिछले वर्ष की तुलना में पांच से दस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जबकि एनसीईआरटी की किताबों के दाम में नाममात्र का इजाफा हुआ है। कापी-किताब के दाम में बढ़ोत्तरी पर मिश्रबाजार निवासी अभिभावक दिनेश साहू एवं अरविंद गुप्ता कहते हैं कि हर वर्ष इनके मूल्य में इजाफा हो जाता है। इससे जुलाई माह में अभिभावकों का बजट असंतुलित हो जा रहा है।
स्कूलों में किताबों की बिक्री किया जाना अनुचित है। बेसिक से मान्यता प्राप्त विद्यालयों में किताबों की बिक्री किए जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सीताराम ओझा, प्रभारी जिला बेसिक शिक्षाधिकारी