गाजीपुर। एसपी डाॅ. ईरज राजा ने सोमवार को कासिमाबाद के तत्कालीन कोतवाल शैलेंद्र पांडेय को निलंबित कर दिया। करीब पांच माह पूर्व कासिमाबाद कोतवाली के एक गांव की युवती के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपी को बचाने के लिए छेड़खानी का मुकदमा दर्ज हुआ था। पीड़िता के बयान के बाद दर्ज मुकदमा की कलई खुली थी और आनन-फानन में कार्रवाईयों का दौर शुरू हो गया। प्रारंभिक जांच के बाद हुई कार्रवाई से मकहमे के ऐसे पुलिस अधिकारियों में खलबली मची हुई है। जबकि एक दूसरे मामले में तत्कालीन कोतवाल दो माह तक निलंबित रहने के बाद अक्तूबर माह में ही बहाल हुए थे। मालूम हो कि बीते 2 जून को कोतवाली क्षेत्र के एक व्यक्ति ने पुलिस को तहरीर देकर गांव के ही एक युवक पर पुत्री के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाया था। आरोप है कि इसके बाद दबाव में आकर पुलिस ने तहरीर बदलवाकर 3 जून को छेड़खानी का मुकदमा दर्ज किया, जबकि आरोपी को शांति भंग में चालान कर मामले की इतिश्री कर दी गई थी। पीड़िता के मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान में दुष्कर्म की पुष्टि होने पर पुलिस ने पांच माह बाद धाराएं बढ़ाकर बीते 30 अक्तूबर को दुष्कर्म आरोपी युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस दौरान आरोप लगे कि भाजपा नेता ने मामले में मध्यस्थता कर एक लाख रुपये लिए थे। बाद में जब मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आया तो भाजपा नेता मन्नू बिंद के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इधर पूरे मामले की एसपी ने विभागीय जांच बैठा दी थी। एसपी डाॅ. ईरज राजा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में दोषी पाए जाने पर कासिमाबाद के तत्कालीन कोतवाल शैलेंद्र पांडेय को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि जांच चल रही है।