शहर के बंशीबाजर के एक पैलेस में साहित्य चेतना समाज के स्थापना-दिवस पर साहित्यकार जगदीश बरनवाल क
गाजीपुर। साहित्य चेतना समाज के 40वें स्थापना दिवस के अवसर पर वंशी बाजार स्थित एक पैलेस के सभागार में विशिष्ट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कृष्णा मिश्रा ने अपनी रचना अपनों से कभी जीत करके हारना भी है, फिर हार कर जीतने का नाम ज़िंदगी, कवयित्री रीना तिवारी ने यूं तो दुनिया में अपने बहुत हैं मगर, मां से बढ़कर जमाने में कोई नहीं सुनाकर प्रशंसा अर्जित की।
युवा कवि रुद्रनाथ त्रिपाठी ''पुंज'' ने अपनी कविता जय हो पत्नी, जय हो पत्नी-मेरे बच्चों की माता, विदुषी साहाना ने अपना गीत उन्मुक्त नयन के दर्पण में मैंने तेरी छवि उतार ली प्रस्तुत कर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। इसके अलावा मासूम राशदी, शशि प्रेमदेव, श्वेतांक सिंह, डॉ. नवचंद्र तिवारी, राजकुमार ''आशीर्वाद'' ने अपने काव्यपाठ से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। इससे पहले संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ''अमर'' ने आगंतुकों का स्वागत किया। इस अवसर पर आजमगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश बरनवाल ''कुंद'' को चेतना सम्मान से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने के बाद उन्होंने समाज एवं राष्ट्र को सही दिशा देने में साहित्य की महती भूमिका को रेखांकित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि शासकीय अफीम एवं क्षारोद कारखाना के महाप्रबंधक दौलत कुमार ने संस्था के कार्यों की सराहना की। कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष डाॅ. रविनंदन वर्मा, सचिव हीराराम गुप्ता, डॉ. अक्षय पांडेय, उपाध्यक्ष संजीव गुप्त, कोषाध्यक्ष राजीव मिश्र, राघवेंद्र ओझा, विपिनबिहारी राय, अमित राज, पंकज राय, अर्चना तिवारी, डॉ. अरविंद दूबे आदि उपस्थित थे। अध्यक्षता डॉ. ईश्वरचंद्र त्रिपाठी एवं संचालन डॉ. नागेश शांडिल्य ने तथा अंत में संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया।