1974 में बना करीमुद्दीपुर के प्राथमिक विद्यालय हरदासपुर का जर्जर भवन।
कभी भी धराशायी हो सकते हैं नगर व ग्रामीण इलाके में सरकारी भवनों के निष्प्रयोज्य घोषित होने के बाद भी अधिकारी और कर्मचारी जान जोखिम में डाल प्रतिदिन सरकारी कामकाज निपटाते हैं। नगर की कई सरकारी काॅलोनियां भी कंडम घोषित की जा चुकी है। जिसमें सालों से कर्मचारी रह रहे हैं। नगर के गोराबाजार इलाके में स्थित ई-टाइप, बी-टाइप और एफ-टाइप की सरकारी काॅलोनी एक-एक कर कंडम घोषित की जा चुकी हैं। वर्ष 2003 में ई-टाइप काॅलोनी को कंडम घोषित किया गया। इसके बाद वर्ष 2007 में ई-टाइप की सरकारी काॅलोनी को भी कंडम घोषित कर दिया गया। ऐसा होने के बाद भी यहां रह रहे कर्मचारियों ने अपना आवास नहीं बदला और आज भी उसमें रह रहे हैं।
इसके बाद विभाग ने एफ-टाइप काॅलोनी को वर्ष 2010 में कंडम घोषित किया। यह काॅलोनियां अपना 100 साल लगभग पूरा कर चुकी हैं। तीनों कालोनी में करीब 100 आवासीय कमरे हैं। इनके अलावा जनपद के अन्य तहसीलों में भी सरकारी भवनों को कंडम घोषित किया गया है। लोक निर्माण विभाग ने काॅलोनी में रहने वालों को खाली करने के लिए अब तक दर्जनभर बार नोटिस जारी किया है। लेकिन इन भवनों को आज तक गिराया नहीं गया है। यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
जनपद के अलग-अलग तहसीलों तथा विकास खंडों में दर्जनों सरकारी भवन जर्जर हालत में हैं। बताया जाता है कि ऐसे भवनों के बारे में विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों ने सूचना वरीय अधिकारियों को दे दी है। बावजूद इन भवनों की न तो मरम्मत कराई गई और न ही गिराया गया। नये भवन कब बनेंगे, यह बताने को भी कोई तैयार नहीं है।