Ghazipur News: देश सेवा में हमेशा वीरों की धरती गाजीपुर आगे रही है। यहां के फौजियों ने सभी लड़ाई में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। यहां देश सेवा का भाव बच्चे-बच्चे में बसा है।
वीरों की धरती गाजीपुर को यूं ही नहीं कही जाती है। यहां के लोग मां भारतीय की आन-बान और शान के लिए हर समय सबकुछ न्योझावर करने को तैयार रहते हैं, जिसका इतिहास गवाह रहा है। देश की रक्षा में जब जब जान की बाजी लगानी पड़ी यह जनपद सीना चौड़ा किए सदा अगली पंक्ति में खड़ा रहा। जंग-ए-आजादी से लेकर अब तक शायद ही ऐसी कोई लड़ाई रही हो जब यहां के वीर जवानों ने देश का मस्तक ऊंचा न किया हो, चाहे प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध हो या 1965 या फिर 1971 का युद्ध या कारगिल की लड़ाई। यहां के फौजियों ने सभी में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।
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यहां देश सेवा का भाव बच्चे-बच्चे में बसा है। इसका अंदाजा इससे भी सहज लगाया जा सकता है कि जिले में इस समय में 33 हजार रिटायर्ड जवान और उनके आश्रित हैं, जिनमें आज वहीं उत्साह है। जबकि बड़ी संख्या में देश के सपूत मां भारतीय की सेवा में जहां लगे हैं वहीं अधिक संख्या में ही युवा देश सेवा के लिए बार्डर पर जाने की तैयारी करते नजर आते हैं।
सेना में तो देश भर में गहमर गांव से ज्यादा किसी गांव की भागीदारी नहीं है। 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में असाधारण बहादुरी का परिचय देने वाले परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद भी इसी जिले धामूपुर से रहे हैं, जो भारत-पाक युद्ध में अमेरिकी निर्मित पैटर्न टैंक को ध्वस्त कर न सिर्फ दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे, बल्कि भारतीय खेमे में जबर्दस्त जोश का संचार किया था। इस युद्ध में 10 से अधिक जवान शहीद हुए थे।
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इसी तरह वर्ष 1971 में हुए पाकिस्तान से जंग की बात करें तो देश की जीत की पटकथा लिखने में जिले के वीर जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। 23 नवंबर 1971 की रात में अपने पराक्रम से राम उग्रह पांडेय ने दुश्मन के तीन बंकरों को नेस्तनाबूद कर दिए थे। बौखलाए पाकिस्तानी फौज ने भारी गोलाबारी की। बावजूद इसके वह दुश्मनों के दांत खट्टे करते हुए शहीद हो गए। उन्हें मरणोपरांत सेना के महान पदक महावीर चक्र से विभूषित किया गया।
इसी तरह इस जंग में जिले के 27 मां भारतीय की सेवा में अपने प्राण तक न्योझावर कर दिए थे। सीआरपीएफ के रिटायर्ड सूबेदार कांता यादव आज भी उस जंग को याद करते हैं। कहते हैं उनकी तैनाती 21 बटालियन सीआरपीएफ में पश्चिम बंगाल में थी। वर्ष 1971 की जंग को लेकर हमारी पूरी तैयारी नहीं थी। पाकिस्तान ने एकाएक हमला कर दिया। इसके बावजूद ऐतिहासिक जीत मिली।
1971 के युद्ध में 27 जवान हुए थे शहीद
वशिष्ट नारायण दुबे, अब्दुल गफ्फर शाह, मो. शफीउल्ला मियां, विजय नारायण सिंह, जितम सिंह, मान सिंह, राम केवल राम, ब्रम्हानंद पांडेय, विश्वनाथ सिंह, छेदीखान, राज कुमार सिंह, मानभाई उपाध्याय, रामचंद्र मिश्रा, रामउग्रह पांडेय, शिवपूजन राय, रामध्यान सिंह, राजनाथ सिंह यादव, कैलाश नाथ तिवारी, अनंत सिंह, शौकत अली अंसारी,फौजदार सिंह,श्रीपत, मो. सलीम खान, राजनारायण सिंह राठौर, वशिष्ठ सिंह,रामदेव सिंह, छेदी सिंह यादव।
कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे छह जवान1999 में हुए भारत-पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध में भारत के तकरीबन 527 जवान शहीद हो गए थे और 1363 जवान घायल हुए थे। 527 शहीद में से छह जवान इस जिले के थे। इनमें शेषनाथ यादव, संजय सिंह यादव, कमलेश सिंह, जय प्रकाश यादव, रामदुलार यादव और इश्तियाक गाजीपुर जिले के रहने वाले थे।
क्या बोले रिटायर्ड फौजी
पाकिस्तान में आतंकी शिविरों के खिलाफ यह सैन्य कार्रवाई न केवल आतंक फैलाने वाले उन आतंकियों को करारा जवाब है, बल्कि भारत की रणनीतिक ताकत, युद्ध-कुशलता और अटूट संकल्पक का प्रमाण भी है। -अशोक सिंह पूर्व सैनिक गहमर
हम फौजी लोग है। चूहों को बिल से निकाल कर कैसे मारना जानते हैं। कहा था न कि पाकिस्तानी चूहों के साथ हम क्या करेंगे। इसका अंदाजा उनके हुक्मरानों को भी नहीं लगेगा। बदला लेंगे बदल देगे नक्सा-ए-पाकिस्तान। -कृष्णानंद यादव पूर्व सैनिक गहमर
56 इंच के सीना का खौफ आतंकिस्तान, पाकिस्तान की फिजा में तैर रहा है। आतंकियों के अड्डे ध्वस्त हो चुके हैं। आतंक के खिलाफ जीरो टालरेस का यह खुला वैश्विक संदेश है। पीएम मोदी का धैर्य के साथ लिए गए प्रतिशोध व भारतीय सेना के शौर्य को सैल्यूट। -प्रदीप सिंह पूर्व सैनिक गहमर
पराक्रमी सेना को पहलगाम हमले का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए बधाई। सरकार और पराक्रमी सेना की कार्रवाई की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम होगी। -रणविजय सिंह पूर्व सैनिक गहमर