समाजवादी नेता एवं विधानसभा सदस्य रामकरन यादव उर्फ दादा की पहचान आमजन से जुटे राजनेता के रूप में थी। आरोपो- प्रत्यारोपों में घिरे राजनीतिक परिवेश में रामकरन यादव की सहजता और शालीनता उनकी विशिष्ट पहचान बनाती थी। उनकी साफगोई और सहजता ने उन्हें पूर्वांचल के गांधी की पहचान दी। आमजन में दादा के नाम से ख्याति प्राप्त स्व. रामकरन यादव समाजवादी विचार धारा के चलते-फिरते दर्शन थे। जिनसे गैर दलों के लोग भी उनसे अदब से मिला करते थे। यह बात गुरुवार को सिधौना में समाजवादी नेता एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य रामकरन यादव की पुण्यतिथि पर आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि पूर्व सांसद रामकिशुन यादव ने कही।
कहा कि रामकरन यादव आजीवन आम जन की लड़ाई, खेत, सड़क, फूटपाथ के दर्द को उन्होंने सामान्य मंच से विधानसभा और विधान परिषद के गलियारों तक लड़ी। पूर्व विधायक और बसपा नेता दीनानाथ पांडेय ने कहा कि दादा कर्मयोगी थे। पूर्व विधायक धानापुर मनोज सिंह ने कहा कि उन्होंने समाजवाद को ठेठ गवंई चरित्र में व्याख्यायित किया। पूर्व विधायक प्रभुनारायण यादव ने उन्हें सामाजिक समानता और आमजन का पुरोधा बताया। वह सदैव सबको साथ लेकर चलने वाले थे। वह समाजवादी विचारधारा के चिंतक थे। पूर्व प्रमुख रमाशंकर सिंह ने स्व. रामकरन यादव को आम जन का नेता बताते हुए कहा कि उनकी कथनी करनी में भेद नहीं था। इस दौरान पूर्व विधायक हरीनाथ यादव, गन्ना समिति के चेयरमैन संजय सिंह, तेजबहादुर सिंह ठाकुर, रमाशंकर सिंह, डॉ. वंशीधर यादव, डॉ. राजेश पाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य कैलाश यादव, अतुल सिंह, राजेंद्र यादव, वेदप्रकाश यादव, डॉ. जय सिंह यादव, राजन सिंह, मेराज अहमद, शशि सोनकर, भोनू राम सोनकर, चूरामन सिंह, अजय यादव, दिनेश यादव, सुरेंद्र जायसवाल, राजेश बरनवाल, प्रभुनाथ गुप्ता आदि रहे। अध्यक्षता सपा प्रदेश कार्य समिति के वरिष्ठ सदस्य हरिनाथ यादव और संचालन राज बिहारी मिश्र ने किया। अंत में एमएलसी विजय यादव ने सभी का आभार व्यक्त किया।