आधा सेमी प्रतिघंटे हो रहा गंगा में बढ़ाव
पिछले लगभग दो सप्ताह से गंगा के जलस्तर में वृद्धि तथा कटान का सिलसिला जारी है। बुधवार को आधा सेमी मीटर प्रति घंटे जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई। बढ़ाव का क्रम जारी रहने से गंगा की लहरें तेजी से उपजाऊ भूमि को काट रही हैं। जलस्तर में वृद्धि होने पर कटान पीड़ितों के माथे पर इस बात से बल पड़ने लगा है कि इस वर्ष भी उनकी भूमि कटान की भेंट चढ़ेगी। बुधवार को जलस्तर 59.810 मीटर रहा, जबकि मंगलवार को 59.720 मीटर था। खतरे का निशान 63.05 मीटर है।
मुहम्मदाबाद में करीब नौ साल से सेमरा, शिवरायकापुरा के साथ ही करंडा के पुरैना, सोकनी, बयेपुर, कसेरा, और बड़हरिया गांव में कटान का क्रम जारी है। जैसे ही गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने के साथ ही कटान पीड़ितों इस बात से चिंतित हो जाते हैं कि गंगा मईया इस साल भी हम लोगों को उजाड़ने का काम करेंगी। ऐसा होता भी आया है। अभी तक पुरैना, सेमरा और शिवरायपुरा में दर्जनों मकान कटान की भेंट चढ़ चुके हैं।
अधिकांश लोग अभी भी प्राइमरी विद्यालयों सहित इधर-उधर खानाबदोश की जिंदगी जीने को विवश हैं।बीते नौ जुलाई से अचानक गंगा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम शुरू हो गया है। 15 सेमी मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गंगा बढ़ रही थी। बाद में तेजी से घटाव शुरू हो गया था और गंगा का जलस्तर काफी नीचे चला गया था। इसी बीच शनिवार से एक बार फिर से दो सेमी प्रतिघंटा की रफ्तार से बढ़ाव शुरू हो गया।
सोमवार को वृद्धि की रफ्तार कम जरूर हुई है, लेकिन अब भी आधा सेमी की रफ्तार से जलस्तर में वृद्धि जारी है। इससे कटान पीड़ितों के माथे पर बल पड़ने लगा है। कटान को रोकने के लिए शासन द्वारा कोई ठोस पहल न किए जाने एक तरफ जहां पीड़ितों के मकानों पर खतरा मंडरा रहा है, वहीं धीमी रफ्तार में कटान में शुरु हो गया है।जानकारों का कहना है कि पानी बढ़ने पर मिट्टी कटती है और घटने पर कटी भूमि चट्टान के रूप में गंगा में गिरनी शुरू हो जाती है।
पानी घटने पर कटान के रफ्तार में और तेजी आएगी। पिछले आठ वर्षों में कटान के कहर का आलम यह है कि जहां कभी लोगों की आबादी हुआ करती थी, आज वहां गंगा की धारा बह रही है।