गहमर। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) फॉर्म भरते समय नई पीढ़ी और युवाओं को अपने पूर्वजों को जानने का अवसर मिल रहा है। अधिकांश युवाओं को अपने दादा-दादी और नाना-नानी कहां से है या उनके नाम क्या है, इसकी जानकारी नहीं है। अब वे जानना चाहते हैं कि उनके पूर्वज कहां के रहने वाले थे। कहां से आकर वर्तमान में बसे हैं।एसआईआर के लिए फॉर्म भरवाते समय विशेष रूप से 2003 की मतदाता सूची के आधार पर पिता और दादा के नाम पूछे जा रहे हैं। कई मतदाता दादा और नाना के नाम भी नहीं बता पा रहे हैं। अब सबको इसकी जानकारी धीरे-धीरे हो रही है। ऐसे में उन्हें पता चल रहा है कि कौन कहां से आया था और कैसे वह मौजूदा समय के निवासी बने हैं। लोगों को फॉर्म देकर बीएलओ ने पूरा ब्यौरा मांगा है। उनसे 2003 की मतदाता सूची के हिसाब से पूरा ब्यौरा बिंदुवार भरने के लिए कहा गया। गहमर की राजकुमारी ने बताया कि फाॅर्म में माता-पिता की पूरी जानकारी मांगी गई है। 2003 के पहले उनके माता-पिता की मौत हो गई थी। ऐसे में मायके से मंगवाई गई 2003 की वोटर लिस्ट में उनका नाम ही नहीं है। इसी तरह, बारा के रामचंद्र के पिता का नाम सही है या नहीं, इसके लिए वह दादा का भी नाम रिश्तेदारों से पूछ रहे हैं। यही स्थिति महिलाओं के नाम के साथ है। गदाईपुर के दीप्तांसु तिवारी अपनी मम्मी के साथ ही साथ नानी का भी नाम खोज रहे हैं। नई पीढ़ी के लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। बीएलओ के सवाल करने पर लोग कन्नी काटने लगते हैं। बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो 50 साल से अधिक के हैं, वह भी जानकारी नहीं दे पा रहे हैं, न ही यह बता पा रहे हैं कि वहां मौजूदा समय कैसे आए और कहां के मूल निवासी हैं। ब्यौरा पूरा न मिलने पर लोग बीएलओ से नाराजगी जता रहे हैं।