दुबिहां। स्थानीय गांव में शनिवार को रामलीला में महर्षि विश्वामित्र ने यज्ञ की रक्षा के लिए राजा दशरथ से उनके पुत्र राम और लक्ष्मण को मांगने और ताड़़का वध की लीला हुई।रामलीला में महर्षि विश्वामित्र एक यज्ञ कर रहे है, लेकिन वन क्षेत्र में राक्षसों द्वारा उत्पात मचाया जाता हे। विशेष रूप से ताड़़का और उसके पुत्र सुबाहु जैसे दैत्य ऋषियों के तप और यज्ञों में बाधा डालते है। उनके अत्याचारों से संपूर्ण वन क्षेत्र में भय और असंतोष का माहौल व्याप्त हो जाता है। महर्षि विश्वामित्र राक्षसों से मुक्ति पाने के लिए अयोध्या के राजा दशरथ से सहायता की मांग करते है। वे राजा से कहते है कि उनके पुत्र राम, जो दिव्य शक्तियों से युक्त हैं, इस कार्य को पूरा कर सकते हैं। प्रारंभ में राजा दशरथ यह कहकर मना कर देते है कि राम अभी बालक हैं और उन्हें राक्षसों से युद्ध के लिए भेजना उचित नहीं होगा, लेकिन महर्षि वशिष्ठ ने राजा समझाया कि यह अवसर राम की दिव्य लीला का प्रारंभ है और विश्वामित्र के साथ जाने से उन्हें दिव्य ज्ञान एवं शस्त्र-विद्या की प्राप्ति होगी।