गाजीपुर जनपद के सुहवल स्थित स्थानीय गांव स्थित चारो धाम परिसर में नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम चरित मानस महायज्ञ एवं रुद्र महायज्ञ आयोजित है। सातवें दिन कथावाचक भागवताचार्य हरिप्रकाश महाराज ने कहा कि आध्यात्म कोई मंजिल नहीं बल्कि यात्रा है। यह बड़ा सरल है, फिर भी लोग मन में कई भ्रांतियां पाल लेते हैं कि कहीं आध्यात्मिक होने पर घर छोड़कर संन्यास लेना पड़ जाए। कहीं बैरागी न हो जाऊं, कहीं गृहस्थ धर्म न छोड़ दूं। आध्यात्म तो हमें जीवन जीना सिखाता है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्म घर-गृहस्थी में तालमेल बैठाना सिखाता है। इसलिए धर्म कोई भी हो, लेकिन सभी को आध्यात्मिक अवश्य होना चाहिए। वही जीवन का मूल है। हम अपने जीवन में संपूर्ण विधाओं को एक नया आयाम देते हैं और उस मूल बिंदु से परम शाश्वत सत्य की ओर उन्मुख होते हैं। आध्यात्म की शुरुआत वहीं से प्रारंभ होने लगती है। जीवन को जगाने की प्रक्रियाओं में जिज्ञासा का प्रादुर्भाव होना एवं उपासना की ओर अग्रसर होना, साधना में प्रवृत्त हो जाना आध्यात्म तक पहुंचने का क्रम है। भागवताचार्य हरिप्रकाश महाराज ने कहा कि हमारा शरीर असीम शक्तियों का पुंज है, जिसकी ऊर्जा निरंतर प्रवाहित होती रहती है, लेकिन हम उसे समझ नहीं पाते। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।