श्रावण मास भगवान भोले शंकर का प्रिय मास है। इस माह के नजदीक आते ही जहां शिव मंदिरों की सजावट की तैयारी जोर पकड़ने लगी है। वहीं शिव भक्त उत्साह से भर उठे हैं। हफ्तों पहले से मंदिर परिसर की साफ-सफाई के साथ मंदिर के रंगरोगन का भी कार्य होने लगा है। वहीं, शिव भक्त विभिन्न धाम को जाने के लिए अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। सैदपुर भी काशी की ही तरह मंदिरों का नगर है। यहां गंगा के किनारे घाटों और मंदिरों के कई संकुल हैं। सावन माह में इन मंदिरों की छटा और निखर जाती है। सैदपुर नगर का बूढ़ेनाथ महादेव प्राचीन समय से इस क्षेत्र के शिव भक्तों के श्रद्धा और विश्वास की स्थली रहा है। इस मंदिर पर सावन माह में नगर ही नहीं आसपास के सुदूर इलाके के कावंरिए गंगा में स्नान कर महादेव का जलाभिषेक करने के बाद देवघर बैजनाथ धाम के अलावा अन्य द्वादश ज्योतिर्लिंग के दर्शन और जलाभिषेक के लिए जाते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां मेले जैसा दृश्य रहता है। भोर से ही भक्त दुग्धाभिषेक के लिए कतार में लग जाते हैं। पूरे दिन यह क्रम चलता रहता है। श्री बूढ़ेनाथ महादेव प्रबंध समिति की ओर से महा दुग्धाभिषेक का कार्यक्रम आयोजित होता है। क्षेत्र के दक्षिण पूर्वी भाग पर स्थित धुवार्जुन का चौमुख धाम मंदिर, पश्चिमी ओर रामपुर में स्थित बिछुड़ननाथ महादेव मंदिर एवं गंगा गोमती की संगम स्थली कैथी में मारकंडेय महादेव मंदिर पर पूरे सावन भर आस्था का सैलाब उमड़ता है। इन मंदिरों पर एक पखवारे पूर्वं से तैयारी जारी है। पुलिस प्रशासन के अलावा प्रशासनिक अमला भी संभ्रांत नागरिकों की बैठक आयोजित कर उनके सुझाव और व्यवस्था की तैयारी में अभी से जुट गया है।