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नानी के साथ जाने से बची शेरू की जान, पिता हुए बदहवास

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विपदा में बच्चों के लिए ढाल बनने वाली मां आखिर कितनी नाराज थी जिसने अपने ही हाथों से अपने तीन बच्चों को जहर पिला दिया। यह तो संयोग ही रहा कि तीन वर्षीय मासूम शेरू अपनी नानी के साथ गांव में कहीं गया था, जिससे वह बाल-बाल बच गया। आरोपी महिला को ससुराल और मायके के गांव के लोग कोसते नजर आए। इधर मंगलवार को बदहवास अवस्था में गुड़गांव से साईत बांध गांव पहुंचा बच्चों का पिता बालेश्वर यादव अपनों को देख कर फफक कर रो पड़ा। तीनों बच्चों का शव देख लोगों का कलेजा फटा जा रहा था। घटना ने सभी का झकझोर कर रख दिया।
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गुड़गांव की एक फैक्ट्री में काम कर परिवार का जीविकापार्जन करने वाले बालेश्वर यादव को घटना की जानकारी होते ही वह गांव के लिए रवाना हो गया। स्थिति ऐसी थी कि वह चलने लायक भी नहीं था। गांव के लोग सहारा देकर किसी तरह घर ले गए। उसने बताया कि बाहर रहते हुए भी वह अपने परिवार को पूरा पैसा भेज देता था। फोन पर हुई बात पर पत्नी सुनीता द्वारा खर्च की अधिक मांग करने पर मैंने असमर्थता की बात कही थी। ग्रामीणों ने बताया कि घर की स्थिति ठीक नहीं है। बालेश्वर यादव का छोटा भाई घर में ही एक किराने की दुकान चलाता है। दोनों भाइयों का परिवार संयुक्त है। जर्जर मकान में ही दोनों का परिवार रहता है। आसपास के लोगों का क हना है कि आरोपी महिला शुरू से ही झगड़ालू प्रवृत्ति की रही है। इधर घटना के बाद दूसरे दिन भी ढढनी भानमल राय और साईत बांध में सिर्फ परिजनों के चीत्कार ही सुनाई दे रही थी। गांव के कई घरों के चूल्हे नहीं जले, लोग मां को कोसते नजर आ रहे थे। गांव की ओर जाने वाले प्रमुख मार्ग और गलियां पर सन्नाटा पसरा था।
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