कर्मचारी सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों को छलावा मानते हैं और उसके खिलाफ लड़ाई छेड़ दी है। राज्य कर्मचारियों ने आंदोलन के पहले चरण में सोमवार को प्रधानमंत्री को पोस्टकार्ड लिखकर अपनी भावनाओं से अवगत
कराया। पत्र में आयोग की संस्तुतियों को कर्मचारी विरोधी बताते हुए उसे वापस लेने की मांग की गई है। इस क्रम में कर्मचारी 21 दिसंबर को बाइक जुलूस निकालेंगे। 22 एवं 23 दिसंबर को प्रदेश व्यापारी हड़ताल पर रहेंगे।
विकास भवन में सोमवार को एकत्रित हुए राज्य कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री के नाम पोस्टकार्ड पर पत्र लिखा। पत्र में राज्य कर्मचारियों ने सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की है। इस दौरान बड़े
पैमाने पर आंदोलन के लिए संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया गया। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष व संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक अंबिका प्रसाद दुबे ने कहा कि सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में संशोधन नहीं
किया गया तो बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। सातवे वेतन आयोग की रिपोर्ट कर्मचारी विरोधी है, इसे सरकार को वापस लेना होगा। परिषद के सलाहकार मुक्तेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि सातवें वेतन आयोग को लेकर अपनी
जितनी रिपोर्ट आई है, उनमें यह रिपोर्ट सबसे अधिक कर्मचारी विरोधी है। सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ राज्यकर्मी आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी। संघर्ष समिति के चेयरमैन अनंत सिंह ने कहा कि सातवें वेतन
आयोग की रिपोर्ट लागू होने से राज्यकर्मचारियों और शिक्षकों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी।
इस दौरान राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय आह्वान पर राज्य कर्मचारी जिले में 21 दिसंबर को बाइक जुलूस
निकालने और 22 और 23 दिसंबर कलमबंद हड़ताल हड़ताल पर रहेंगे। विकास भवन पर धरना दिया जाएगा। इस दौरान डॉ. दुर्गेश सिंह, अरुण सिंह, राकेश सिंह, प्रमोद उपाध्याय, अमित श्रीवास्तव, सुनील सिंह, अभय सिंह, चंद्रिका
यादव, जमुना यादव, बृजेश यादव, हनुमान यादव, परवेज, आलोक श्रीवास्तव, जीतेंद्र यादव, मनीष सिंह, रामकुंवर कुशवाहा, अभय राज सिंह, संजय यादव, विवेक गुप्ता, रणजीत सिंह, रामप्रकाश राय आदि मौजूद रहे।