निराश्रित गोवंश के आश्रय स्थल की स्थापना, क्रियान्वयन एवं संचालन को लेकर जिला स्तरीय समिति की बैठक शुक्रवार को हुई। इसमें जिलाधिकारी एमपी सिंह ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से जनपद में अब तक कितने ब्लॉक स्तरीय बैठक संपन्न हुई और जनपद के गोवंश आश्रय स्थलों में पशुओं की संख्या की जानकारी ली। जिसमें बताया गया कि नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कुल 58 गो-आश्रय स्थल है जिसमें पशु रखे गए हैं। जिलाधिकारी ने मुख्यमंत्री निराश्रित बेसहारा सौभाग्य योजना तहत उपस्थित पशु चिकित्सकों से अब तक कितने पशुओं को चिंहित कर पशुपालकों को दिए गए इसकी जानकारी ली।
उन्होंने पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिया कि इस योजना में कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों के परिवारो में दुधारू पशुओं को दिया जाए। कहा कि जिन-जिन ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा पशु प्राप्त होते हैं तो संबंधित नगर निकाय, पंचायत, पशु चिकित्सक के विरुद्ध मुकदमा पंजीकृत कराने का निर्देश दिया।
खंड विकास अधिकारी रेवतीपुर एवं भांवरकोल को निर्माणाधीन गो-आश्रय स्थल की गलत रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्टीकरण का निर्देश दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि सहभागिता योजना के तहत पशुपालाको में दिए जाने भुगतान समय से किया जाए। इसमे लापरवाही क्षम्य नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रो को चिन्हित करते हुए बरसात से पूर्व पशुओं के लिए भूसा चयनित विक्रेताओं से क्रय कर पहले से ही स्टोर में जमा कर लिया जाए। जिससे बाद में कोई समस्या न हो पाए। बैठक में उन्होंने निर्माणाधीन निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल की स्थापना की समीक्षा की एवं उसके सत्यापन के लिए उपस्थित पशु चिकित्सकों को स्थलीय निरीक्षण कर उसकी भौतिक प्रगति फोटोग्राफ के साथ उपलब्ध कराने कराने का निर्देश दिया।
बैठक में मुख्य पशु चिकित्साधिकारी एसके रावत, डीसी मनरेगा और समस्त अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद, पंचातय एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।