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Ghazipur News: परीक्षा कराने वाली संस्था के डायरेक्टर की तलाश, 20 हजार देकर विद्यालय को बनाया था सेंटर

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गाजीपुर। मर्चेंट नेवी की फर्जी ढंग से परीक्षा कराने के मामले में गिरफ्तार दोनों आरोपी शुक्रवार को जेल भेज दिए गए। पूछताछ से यह बात सामने आई कि परीक्षा कराने वाली संस्था नॉर्थ इंडिया मरीन एकेडमी एंड मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने अल्टरनेट स्कूल को सेंटर बनाने के लिए 20 हजार रुपये दिए थे। हालांकि संस्था के डाॅयरेक्टर और उससे जुड़े लोगों की तलाश पुलिस कर रही है। पूछताछ में कुछ मोबाइल नंबर भी मिले हैं, जो स्विच ऑफ बता रहे हैं। गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आरोपी दिनेश जाट निवासी बडल्ला थाना बारामील सराना जिला अजमेर और सचिन बगडिया निवासी ग्राम पालडि थाना बालारा जिला सीकर राजस्थान संस्था से जुड़ने से पहले एक-दूसरे से परिचित भी नहीं थे। हालांकि वे संस्था के लखनऊ स्थित हॉस्टल पर वार्डन के रूप में तैनात थे। पूछताछ में दोनों ने बताया कि उन्हें इस कार्य के लिए 15-20 हजार रुपये मिलते थे। सचिन हाल ही में संस्था से जुड़ा। अधिकारियों के कहने पर वे दोनों परीक्षा कराने आ गए थे। संस्था के बारे में विशेष जानकारी भी नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक जांच में यह बात सामने आई कि संस्था का नेटवर्क काफी बड़ी है और वे उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा अपना पांव पसारे हुए हैं। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद ने बताया कि दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। मामले की विवेचना की जा रही है। साथ ही जो तथ्य सामने आ रहे हैं उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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परीक्षा देने आए 11 अभ्यर्थियों से पुलिस ने ली जानकारी

पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ के बाद परीक्षा देने आए 11 छात्रों से जानकारी हासिल की। जिन्होंने बताया कि उन्होंने इस परीक्षा के लिए कोई फार्म नहीं भरा था। मोबाइल पर फोन करके संस्था द्वारा हम लोगों से पूछा गया था कि मर्चेन्ट नेवी में नौकरी करना चाहते हो या नहीं? जवाब दिया गया था कि हां नौकरी करना चाहते है। इसके बाद नाम -पता शिक्षा फोन पर ही पूछा गया था। इसके बाद बताया गया कि एक परीक्षा होगी, उसमें पास होने के पश्चात मेडिकल टेस्ट होगा फिर मर्चेंट नेवी में नौकरी लग जाएगी। करीब एक सप्ताह पहले मोबाइल पर एक लिंक भेजा गया था, जिसको ओपेन करने पर रोल नंबर और विद्यालय (परीक्षा केंद्र) का नाम आ गया। साथ ही प्रवेश पत्र डाउनलोड हो गया, इसलिए वे परीक्षा देने आए थे।
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