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टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ रहे नौनिहाल

Wed, 30 Nov 2016 12:44 AM IST
गाजीपुर अमर उजाला ब्यूरो
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टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ रहे नौनिहाल
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सर्व शिक्षा अभियान के तहत सभी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं सहित डेस्क, बेंच या कुर्सियां उपलब्ध कराया जाना था। लेकिन जिले के अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में बच्चे फर्नीचर के अभाव में आज भी टाट-पट्टी और चटाई पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। गिनती के विद्यालयों में ही डेस्क और बेंच की सुविधा उपलब्ध है। यही नहीं शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र        में दर्जनों विद्यालय ऐसे हैं जो जर्जर भवन में चल रहे हैं।
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इन विद्यालयों में बच्चों को न तो पीने का  साफ पानी नहीं मिल पा रहा है, न ही वहां के शौचालय उपयोग करने लायक हैं।
केंद्र सरकार की ओर से साल 2001 से सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम शुरू किया गया था। इसके तहत यह लक्ष्य रखा गया था कि प्रति किलोमीटर के अंदर प्राथमिक और प्रत्येक तीन किमी के अंदर उच्च प्राथमिक विद्यालय खोले जाएंगे।


इन्हें भौतिक संसाधनों से सुसज्जित किया जाएगा। इसी प्रक्रिया के तहत हर ग्रामसभा में विद्यालय हो गए और इन पर भौतिक संसाधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी कर दी गई लेकिन इसका सही ढंग से क्रियान्वयन न होने के कारण आज तमाम विद्यालय में डेस्क-बेंच और विद्युतीकरण की व्यवस्था नहीं हो पाई है। डेस्क, बेंच की बात तो दूर बच्चों को साफ-सुथरी टाट-पट्टी भी नसीब नहीं है।
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जानकारी के अनुसार जिले में 1953 प्राथमिक विद्यालय और 802 उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें करीब 1333 प्राथमिक एवं 565 जूनियर सहित 1898 विद्यालयों में विद्युतीकरण नहीं है जबकि 258 प्राथमिक एवं 98 उच्च प्राथमिक सहित 356 विद्यालयों में क्रियाशील नहीं है। इसी तरह 896 प्राथमिक एवं 466 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में चहारदीवारी तक नहीं है। प्राथमिक में बालकों के 290 और उच्च प्राथमिक में 149 तथा प्राथमिक में बालिकाओं के 286 और उच्च प्राथमिक में 147 शौचालय इस्तेमाल करने योग्य नहीं हैं। इसके अलावा प्राथमिक के 238 एवं जूनियर के 163 विद्यालयों के बच्चों को पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।


जहां तक परिषदीय विद्यालयों का सवाल है इन विद्यालयों में सभी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए सरकारी तौर पर प्रति वर्ष बजट उपलब्ध कराया जा रहा है।
परिषदीय विद्यालयों की यह हालत है कि प्रति वर्ष धन प्राप्त करने के बाद भी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति मानक के अनुसार पूरी नहीं हो पा रही है जबकि हर वर्ष भौतिक सत्यापन और स्थलीय निरीक्षण करने के लिए सचिव स्तर की टीमें भी आकर विद्यालयों का निरीक्षण करती हैं लेकिन इसके बाद स्थिति जस की तस है।
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