साथी की हत्या की जानकारी मिलने के बाद बीते बुधवार से ही अधिवक्ता आक्रोशित थे। यूपी बार कौंसिल के आह्वान पर गुरुवार को जिले भर के अधिवक्ता सदर, मुहम्मदाबाद, सैदपुर, जखनिया और जमानिया तहसील में लामबंद हो गए। अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से न्यायिक कार्य का बहिष्कार कर जुलूस निकाल कर अपनी नाराजगी जाहिर की।
इसमें सिविल बार और कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अधिवक्ता शामिल थे।
बाद में अधिवक्ताओं ने एसपी कार्यालय के समक्ष चक्काजाम कर धरना दिया। उनका कहना था कि शासन प्रशासन के इशारे पर पुलिस की तानाशाही अब बर्दाश्त के बाहर है। इलाहाबाद में जिस तरीके से दारोगा शैलेंद्र सिंह ने हत्या की है, उससे साफ जाहिर होता है कि पुलिस कानून से बेपरवाह है।
बाद में मांगों के संबंध में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। आंदोलन में मुख्य रूप से कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चिरायु प्रसाद श्रीवास्तव, महासचिव शशिकांत सिंह यादव, ऋषिदेव पांडेय, उपाध्यक्ष कृष्ण मुरारी राय, मीता सिंह कुशवाहा, शिवमूरत राम, सिविल बार संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश वर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष वीरेंद्र कुमार पांडेय, कार्यवाहक महासचिव मुन्ना लाल, राजेश कुमार राय, समरेंद्र सिंह, अब्दुल मलिक खां, राकेश कुमार आदि अधिवक्ता शामिल थे। जमानिया में भी घटना के विरोध में तहसील के अधिवक्ताआें ने प्रदेश सरकार एवं पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। यही नहीं अधिवक्ताओं ने तहसील प्रांगण से जुलूस निकाल कर दूकानों, विकास खंड जमानिया कार्यालय, नगर पालिका कार्यालय जमानिया, सीओ आफिस भी बंद करवा दिए। बाद में तहसील प्रांगण में ही धरना दिया।
धरना पर बैठे अधिवक्ताआें ने दो मिनट का मौन रखकर नबी अहमद को श्रद्धांजलि दी। अधिवक्ताआें ने सर्वसम्मति से 12 और 13 को भी न्यायिक कार्य बहिष्कार का फै सला लिया। 16 तारीख को बार काउंसिल आफ उत्तर प्रदेश के निर्देशानुसार अग्रिम कार्यवाही की जाएगी। इस मौके पर उपाध्यक्ष कमलकान्त राय, एनामुल हक खां, मेराज, फैसल होदा, अंजनी कुमार, मैनूद्दीन खां, सूनील कुमार, विनोद उपाध्याय, संजय दूबे, धनन्जय, रामजी राम, अशोक कुमार, अनिल उपाध्याय, ज्ञान सागर श्रीवास्तव, अंगद सिंह, सोह, अजय राय, मुनेश, श्याम बिहारी सिंह आदि समस्त अधिवक्तागण मौजूद रहे।