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संविदा चालकों के भरोसे रोडवेज

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शहर के मालगोदाम स्थित रोडवेज परिसर में खड़ी बसें। - फोटो : GHAZIPUR
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गाजीपुर। राज्य सड़क परिवहन निगम का स्थानीय डिपो इन दिनों चालकों की समस्या से जूझ रहा है। बेड़े में उपलब्ध बसों के सापेक्ष 48 चालकों की दरकार है। इस संकट को दूर करने के लिए स्थानीय स्तर पर कवायद की जा रही है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। इसके चलते जहां बसों के संचालन पर असर पड़ रहा है, वहीं डिपो को रोजाना अच्छी खासी चपत लग रही है।
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राज्य सड़क परिवहन निगम के स्थानीय डिपो की ओर से विभिन्न नगरों-महानगरों नई दिल्ली, मथुरा, कानपुर, लखनऊ, गोरखपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, मऊ एवं आजमगढ़ आदि जगहों के लिए बसें चलाई जा रही हैं। इसकेे साथ ही जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों के लिए भी बसों का संचालन किया जा रहा है। वर्तमान में स्थानीय डिपो के बेड़े में 87 बसें उपलब्ध हैं, उसके हिसाब से परिचालक तो हैं लेकिन चालकों की कमी काफी समय से बनी हुई है। डिपो में इस समय 146 परिचालक हैं। इनमें 29 नियमित हैं जबकि संविदा परिचालकों की संख्या 117 है। इसी तरह, 138 में 69 संविदा चालक हैं। 48 चालकों की जरूरत काफी समय से है। इनकी कमी बसों के संचालन में आड़े आ रही है। इससे रोडवेज के स्थानीय डिपो को रोजाना करीब डेढ़ से दो लाख रुपये की चपत लग रही है। बस यात्री गिरीश ने बताया कि बसों के इंतजार के दौरान चालकों की समस्या अखरती है। आलम यह है कि लंबी दूरी की बसों को भी चालकों की कमी के कारण कभी-कभी विलंब करना पड़ता है। जबकि लोकल बसें तो आए दिन प्रभावित होती हैं। चालकों के बीमार पड़ने या अवकाश पर होने के दौरान बिना आराम किए कई चालक लगातार ड्यूटी बजाने के लिए मजबूर हो गए हैं।
चालकों की कमी से बसों के संचालन में कठिनाई हो रही है। इससे डिपो की आय भी काफी हद तक प्रभावित हो रही है। चालकों की कमी से निगम के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाता है। कुछ माह पहले इसके लिए पत्र भी लिखा गया था लेकिन अभी भी चालकों की कमी से डिपो जूझ रहा है।
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अरविंद कुमार सिंह, डिपो संचालन प्रभारी
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