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धर्म से ही परिवार सुरक्षित एवं संरक्षित

Sat, 27 Feb 2016 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/गाजीपुर
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स्वामी सहजानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सभागार मेें शनिवार को दो दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री प्रो. वीपी सिंह ने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में एकाकीपन के साथ-साथ अस्मिता एवं पहचान का संकट बढ़ा है। सूचना क्रांति के इस दौर में विश्व ने गांव का रूप ले लिया है।
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 आज धर्म के स्वरूप को समझने की आवश्यकता है, जिससे अस्मिता, पहचान और परिवार को सुरक्षित और संरक्षित किया गया।

 इस अवसर पर महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के समाजशास्त्री प्रो. एसडी सिंह ने कहा कि आर्य एवं आर्योत्तर सांस्कृतिक का मिलन ही भारतीय  संस्कृति है। कहा कि  समाज से जो भी हम सीखते हैं, वहीं संस्कृति है। भूमंडलीकरण धन संबंधी आवश्यकता पूरा कर सकता है, लेकिन मोक्ष नहीं।

समाजशास्त्री प्रो. जीएन तिवारी ने कहा कि भारतीय समाज धर्म आधारित समाज है। वैश्वीकरण धर्म के इर्द-गिर्द घूमती है, जबकि भारतीय संस्कृति में व्यक्ति महत्पवूर्ण होता है। भारतीय संस्कृति  समग्रता के साथ आत्मा एवं शरीर की व्याख्या करता है, व्यक्ति से ही समाज का  निर्माण एवं समाज से व्यक्ति का होता है।
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 प्रो. अमरनाथ राय ने कहा कि बाजार में संबंधों का तिरस्कार किया है, वस्तु और उपभोक्ता ही महत्वपूर्ण हो गया है। इस बीच रिश्तों और अपनेपन को खारिज कर दिया गया है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. विलोक सिंह ने कहा कि भूमंडलीकरण से भारत को क्या मिला है, भारत की  स्थानीय संस्कृति एवं व्यक्ति को ध्यान में रखकर ही वैश्वी ग्राम की रूपरेखा तैयार है।

इस अवसर पर डॉ. अवधेश कुमार पांडेय, सतीश कुमार पांडेय,  विजय कुमार ओझा, एनएन राय, सतीश कुमार राय, रवि राय, अभय कुमार मालवीय,  नित्यानंद राय, अशोक राय, रविंद्र नाथ राय, प्रो. अजय राय, अवधेश नारायण  राय, नीरज राय आदि मौजूद रहे। प्राचार्य डॉ. शशिकांत राय ने महाविद्यालय के  तरफ से सभी का आभार व्यक्त किया।
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