राजकीय नलकूपों एवं लघु डाल नहरों के संचालन में अब लो-वोल्टेज एवं ट्रिपिंग की समस्या नहीं खलेगी। सरकार ने प्रदेश में सरकारी नलकूपों एवं लघु डाल नहरों को सौर और ग्रिड ऊर्जा के हाईब्रिड मॉडल से चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत जिले के 200 राजकीय नलकूपों का चयन किया गया है। इन नलकूपों का संचालन सुचारू होने से, जहां किसानों को राहत मिलेगी, वहीं बिजली की भी काफी बचत होगी।
सरकार की ओर से किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राजकीय नलकूपों की स्थापना कराई गई है। यही नहीं लघु डाल नहरें भी संचालित हैं। ग्रिड संचालित नलकूपों एवं लघु डाल नहरों के संचालन में लो-वोल्टेज एवं ट्रिपिंग की समस्या बनी रहती है। इसके चलते प्रदेश के लगभग 6000 राजकीय नलकूप एवं लगभग 200 लघु डाल नहरें लो-वोल्टेज की समस्या से ग्रसित हैं।
इनके संचालन के लिए गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति न हो पाने से लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल के कृषक सिंचाई से वंचित हैं। इन किसानों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने सौर ऊर्जा एवं ग्रिड ऊर्जा के हाईब्रिड माडल से इन नलकूपों को चलाने का निर्णय लिया है।हाईब्रिड सिस्टम से राजकीय नलकूपों एवं लघु डाल नहरों का संचालन 10 से 12 घंटे तक किया जा सकेगा।
सौर ऊर्जा के उत्पादन से ग्रिड पावर पर निर्भरता कम होगी। बचत की गई इस ऊर्जा को अन्य उद्देश्य के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है जो प्रदेश के विकास में सहायक होगा। सरकार के इस निर्णय से परियोजना के पहले चरण में 6076 राजकीय नलकूप और 57 लघु डाल नहरें संचालित होंगी। परियोजना से 2 लाख हेक्टेयर सिंचन क्षेत्र में वृद्धि की जा सकेगी। यही नहीं इससे सोलर हरित ऊर्जा के उत्पादन का भी अनुमान है।