गाजीपुर। अति प्राचीन रामलीला कमेटी की ओर से 19 दिन तक चलने वाले रामलीला के मंचन की तैयारी तेज कर दी गई है। काशी के रामनगर की तर्ज पर होने वाली इस रामलीला का इतिहास काफी पुराना है। शुरुआती दौर में हरिशंकरी के लोग खुद पात्र बनकर रामलीला का मंचन करते थे, लेकिन करीब 35 वर्षों से बाहर से कलाकारों को बुलाकर मंचन कराया जाता है। इस बार रायबरेली से कलाकार आएंगे। इस रामलीला के मंचन के लिए दस पुतले भी तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें मंचन के दौरान उपयोग में लाया जाता है। इन पुतलों को तैयार करने में महीनेभर से अधिक का समय लगता है।
नगर की ऐतिहासिक रामलीला 28 सितंबर से शुरू होगी, जो 19 अक्तूबर तक अलग-अलग तिथियों पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाकर मंचन किया जाएगा। रामलीला के दौरान रावण, कुंभकरण, मेघनाथ, खर और दूषण, शरभंग मुनिस जटायू राज, कौआ, कच्छप, मछली के पुतले बनकर मंचन किया जाता है। इसके लिए महीने भर पहले से ही रामलीला मैदान में पुतले तैयार कराए जा रहे हैं। समिति के महामंत्री ओम प्रकाश तिवारी बच्चा बताते हैं कि काशी में जब मेधा भगत के साथ तुलसीदास ने रामलीला का मंचन किया उसी वर्ष नगर की रामलीला की शुरुआत हुई। लेकिन इसे रामनगर के नरेश उदित नारायन ने वर्ष 1776 में इसे व्यवस्थित रूप दिया। इसका मंचन अति प्राचीन रामलीला कमेटी द्वारा हरिशंकरी से शुरू हुआ।