सुहवल। दिल्ली से पीएमजी (प्रोजेक्ट मानिटरिंग ग्रुप) के एडिशनल सेक्रेटरी अनिल स्वरूप ने बुधवार को वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए ताड़ीघाट-मऊ रेलखंड परियोजना के कार्यों की समीक्षा की। साथ ही अधिग्रहीत 643 किसानों की भूमि के मामले में सर्किल रेट में असमानता को लेकर जिलाधिकारी न्यायालय में दो वर्ष से पड़े आर्बिटेशन की जानकारी ली। परियोजनाओं को निर्धारित समय तक पूर्ण करने का निर्देश दिया।
बीते सितंबर माह में प्रदेश के मुख्य सचिव एवं केंद्र सरकार द्वारा संचालित परियोजना के प्रगति पोर्टल के नोडल अधिकारी राजेंद्र कुमार तिवारी ने निर्देश दिया था कि पहले चरण की परियोजना को पूरा करने के लिए जरूरी जमीन की उपलब्धता तत्काल सुनिश्चित की जाए। साथ ही आर्बिटेशन के लंबित मामले का निस्तारण कर दिया जाए, जिससे परियोजना प्रभावित न हो सके। बावजूद इसके जिलाधिकारी न्यायालय द्वारा अभी तक उसका निस्तारण नहीं किया गया है। परियोजना विलंबित होने के साथ ही इस पर ग्रहण लगने की आशंका बलवती होती जा रही है। साथ ही काश्तकारों में नाराजगी बढ़ती जा रही। पहले चरण के लिए जमानिया एवं सदर तहसील के कुल 17 गांव के 2783 काश्तकारों की कुल अधिग्रहीत जमीन का 210 करोड़ 56 लाख में से 175 करोड़ 62 लाख रुपये पहले से ही प्रदेश सरकार के खाते में रेलवे ने जमा कर दिया है। इसमें से 168 करोड़ 29 लाख 91 हजार रुपये भुगतान काश्तकारों के खाते में कर दिया गया है। अब सवाल है कि आखिर ऐसी कौन सी परिस्थिति है कि मुख्य सचिव के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद आर्बिटेशन का मामला दो वर्ष से लटका पड़ा है। इस संबंध में आरवीएनएल के परियोजना प्रबंधक सत्यम कुमार ने बताया कि यह बात समझ से परे है कि आखिर दो वर्षों के बाद आर्बिटेशन का निस्तारण सक्षम न्यायालय के द्वारा न किए जाने से परियोजना कभी भी प्रभावित हो सकती है। पीएमजी ( प्रोजेक्ट मानिटरिंग ग्रुप ) सेक्रेटरी द्वारा अब तक हुए कार्यों एवं आर्बिटेशन का निस्तारण न होने की रिपोर्ट पीएमओ कार्यालय को प्रेषित कर दी है।