कासिमाबाद के पास बन रहा पूर्वांचल एक्सप्रेस वे।
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गाजीपुर। प्रदेश का सबसे सुंदर और मजबूत पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर रात-दिन काम चल रहा है। अब तक 60 फीसदी कार्य पूर्ण कर लिया गया है। लेकिन अभी भी 20 फीसदी मिट्टी का कार्य होना बाकी है। हवाई पट्टी के साथ कई जगह मेजर ब्रिज, अंडरपास और माइनर ब्रिज का भी काम अधूरा है। जबकि अगस्त 2020 तक इसे जनता को सुपुर्द करने का लक्ष्य है। लेकिन समय से सब कुछ हो पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है। लॉकडाउन से थोड़ा कार्य प्रभावित जरूर हुआ है। बावजूद कंट्रक्शन कंपनी निर्माण कार्य में रात-दिन जुटी है।
पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे की लंबाई 340 किलोमीटर है। इसका निर्माण आठ पैकेज में किया जा रहा है। पूरे एक्सप्रेस-वे में 60 आरओबी, 60 मेजर ब्रिज, 123 माइनर ब्रिज, 223 अंडरपास के साथ एक हवाई पट्टी का निर्माण किया जाना है। एक्सप्रेस-वे के निर्माण में 18 हजार करोड़ रुपये खर्च भी होना है। दो माह पूर्व इसका निरीक्षण करने आए उप्र के मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने कहा था कि निर्माण कार्य में क्वालिटी से कतई समझौता नहीं किया जाएगा। किसी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। तब उन्होंने बुढ़नपुर स्थित ओरिएंटल स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के कार्यालय में यूपीडा सहित मऊ, गाजीपुर के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की थी। श्री पांडेय यह भी दावा किया था कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे का निर्माण अगले वर्ष हर हाल में अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा और इसे जनता के लिए खोल दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि संबंधित अधिकारियों की माने तो पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे अपने लक्ष्य की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है लेकिन 20 प्रतिशत मिट्टी कार्य अभी भी शेष है। लॉकडाउन में काम न होने से थोड़ा प्रभाव पड़ा है। फिर भी कार्यदायी संस्था इसे समय से पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्पित है। अब देखना यह है कि अगस्त माह तक पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जनता के लिए खोला जाता है या नहीं।