गाजीपुर। राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय एवं प्रेमचंद साहित्य संस्थान गोरखपुर के संयुक्त तत्वाधान में प्रेमचंद को कैसे पढ़े विषय पर 16 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का बुधवार को शुभारंभ किया गया। मुख्य अतिथि प्रेमचंद साहित्य संस्थान के निदेशक एवं हिंदी विभाग काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सदानंद शाही ने कहा कि प्रेमचंद आत्म केंद्रीयता को तोड़कर मन को उदात्त बनाने वाले लेखक थे। वह पाखंड विरोधी थे।
वह जीवन एवं समाज में आए विडंबना को चिन्हित कर उस पर सवाल उठाने वाले लेखक थे। उनकी कहानियों एवं उपन्यासों से गुजरते हुए हम बखूबी अपने देश समाज एवं जीवन के स्पंदन को महसूस कर सकते हैं। अध्यक्षता कर रहे गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सेवानिवृत्त प्राचार्य एवं पूर्व विभागाध्यक्ष प्रोफेसर चितरंजन मिश्र ने कहा कि प्रेमचंद हिंदी साहित्य में तुलसी और कबीर के बाद सबसे अधिक पढ़े जाने वाले एवं लोकप्रिय लेखक हैं। संयोजक डा. निरंजन कुमार यादव ने बताया कि इस कार्यशाला में आठ राज्य के प्रतिभागी सम्मिलित है, जिनकी संख्या लगभग 750 है। कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का स्वागत हिंदी के विभागाध्यक्ष डा. संगीता मौर्य ने किया। इस मौके पर डा. संतन कुमार राम, मीडिया प्रभारी डा. शिवकुमार यादव मौजूद रहे। धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य प्रोफेसर डा. सविता भारद्वाज ने किया।