गाजीपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी के लिए सपा और भाजपा गुणा-गणित बैठाने लगे हैं। दोनों पार्टियों के बीच टक्कर की चर्चा है। ऐसे में बसपा किसके साथ होगी यह राजनीतिक गलियारे में चर्चा का बन गया है। बसपा की चुप्पी किसके लिए घातक होगी या किसके लिए फायदेमंद यह तो वक्त ही बताएगा। क्योंकि उसके पास भी 10 सीटे हैं। वह भले ही अध्यक्ष न लड़ाए पर जादुई आंकड़ा दिलाने में किसी की मदद तो कर ही देगी। उधर, 37 निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य सदस्य भी हैं। जिनको अधिक संख्या में अपने से जोड़ पाना किसी दल के लिए टेढ़ी खीर होगी। तीन जुलाई को होने वाले चुनाव को लेकर जिले में राजनीतिक दलों में कशमकश तेज हो गई है। सपा का दावा है कि जिला पंचायत अध्यक्ष उसका होगा। जबकि भाजपा का कहना है कि उन्होंने 40 सदस्य जुटा लिए हैं। बसपा के जिलाध्यक्ष अजय कुमार भारती कहते हैं कि उनके दल के 10 सदस्य इस बार जिला पंचायत सदस्य हैं और 10 सदस्य बागी होकर चुनाव लड़े थे जो अब पार्टी के साथ हैं। कहा कि पार्टी किसी निर्दलीय को समर्थन देगी। बहुत जल्द ही वह मैदान में आएगा। पिछले दो मई को घोषित जिला पंचायत सदस्य के चुनाव नतीजों से भाजपा को करारा झटका लगा था। फिर भी सत्तारूढ़ दल पूरी ताकत से कुर्सी के लिए लगा है। पिछले कई बार से अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज रहने वाली समाजवादी पार्टी इस बार भी बड़ी दावेदार मानी जा रही है। जिलास्तरीय नेता रणनीति तैयार कर रहे हैं। सपा ने अपने अधिकृत उम्मीदवार का नाम भी घोषित कर दिया है। जिले में कुल 67 जिला पंचायत सदस्य की सीट है जिसमें निर्दल 37, सपा 10, बसपा 10, भाजपा 6, सुभासपा 2 और एआइएमआइएम 2 सीटों पर जीत हासिल की है। ऐसे में अध्यक्ष की कुर्सी की चाभी निर्दलीय सदस्यों के हाथ में होगी। वहीं, बसपा अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी की तलाश में है। इस बार अध्यक्ष की कुर्सी आधी आबादी के लिए सुरक्षित है। देखना है कि जिले के पहले व्यक्ति की कुर्सी पर किस दल के प्रत्याशी को बैठने में सफलता मिलती है। अथवा दलीय प्रत्याशियों पर निर्दल प्रत्याशी भारी पड़ता है।