कुख्यात और शातिर अपराधियों में अपना स्थान बना चुका शिवा हत्या, लूट के साथ रंगदारी समेत कई संगीन अपराध को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जाता था। इसे पकड़ने के लिए जनपद पुलिस के साथ ही एसओजी, क्राइम ब्रांच एवं एलआइयू को लगाया गया था।
पुलिस टीम में तेज-तर्रार दरोगा एवं सिपाही लगाए गए थे, जो लगातार दबिश देते रहे और जल्द पकड़ने का आश्वासन भी दिया था। लेकिन पुलिस को सफलता नहीं मिली। पिछले कुछ सालों में यह पुलिस महकमे के लिए सिरदर्द बना चुका था। छोटे-बड़े अपराधी को पुलिस दबोचने में तो सफल रहती थी, लेकिन शिवा के लोकेशन और ठिकानों तक नहीं पहुंच पाती थी।
वाराणसी, नंदगंज और शहर कोतवाली समेत कई थानों में इसके ऊपर दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस से छिपते-छिपाते उसने नाटकीय ढंग से गैगेंस्टर एक्ट के मामले में गौरव कुमार की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। जहां न्यायालय ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।
जरायम की दुनिया में कदम रखने के बाद शिवा ने कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया है। पुलिस डेढ़ वर्ष से उसकी तलाश में लगी थी। रजदेपुर-देहाती निवासी शिवा बिंद के ऊपर संगीन धाराओं में कई आपराधिक मुकदमों के साथ गैंगेस्टर तक की कार्रवाई की जा चुकी है।
वह शहर के हिस्ट्रीशीटरों में से एक है। इसके ऊपर अपर पुलिस महानिदेशक अपराध शाखा लखनऊ द्वारा 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। वहीं हाल ही में इसे बढ़ाकर एक लाख करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था।
कुख्यात और शातिर अपराधी शिवा बिंद ने एक पत्रकार से जहां दस लाख की रंगदारी मांगी थी। वहीं कई चिकित्सकों को से भी फोन पर रंगदारी मांगने का काम किया गया। काफी शातिर होने के चलते यह पुलिस के लिए चुनौती बन चुका था। आखिरकार पुलिस अपराधी को दबोच नहीं सकी।