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प्रधानमंत्री ने सिन्हा, गहमर, गहमरी के बहाने वोटों को साधा

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गाजीपुर। जिले की धरती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों-इशारों में बहुत कुछ कह दिया। उन्होंने अपनी बात परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद से शुरू की और उनकी पत्नी रसूलन बीबी से होते हुए जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा तक की। प्रधानमंत्री जब भी गाजीपुर आए मंच से किसी न किसी बहाने सिन्हा का नाम जरूर लिया। इसके अगले ही पल गहमर और विश्वनाथ गहमरी के बहाने किसी पार्टी का नाम लिए बिना विरोधियों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया।
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उन्होंने कहा कि गाजीपुर की पहचान गहमर के वीर जवान न होकर माफिया हो गए। ऐसे ही भाई कृष्णानंद राय का संबोधन कर मुहम्मदाबाद सहित गाजीपुर के भूमिहारों को साधने का पुरजोर प्रयास किया। खुली जीप में घूमने वाले को घुटनों पर बैठाने की बात कहकर अपराध और अपराधियों के खिलाफ कड़ा संदेश देकर माहौल बनाने का प्रयास किया।
इसी कड़ी में धीरे-धीरे उनकी बात विकास कार्यों तक गई। इसके लिए परिवारवादी सरकारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कई बार कई तरह से प्रहार किया। उन्होंने कहा कि परिवारवादियों की नजर विकास कार्यों के लिए आए पैसों पर है। अपने एक-एक वोट से उनको जवाब देना है। साथ ही विरोधियों को दिव्यांगों के पेंशन का लुटेरा बताकर पुरानी पेंशन को लेकर बनाए जा रहे माहौल पर भी जवाब दिया। वहीं, जब विश्वनाथ गहमरी के संसदीय भाषण का जिक्र किया तो उसमें गाजीपुर की गरीबी के लिए बिना नाम लिए कांग्रेस ही निशाने पर रही। गहमरी ने अपने भाषण में गोबर से अनाज निकालकर खाने की उस समय की मजबूरी का वर्णन किया था। इसको लेकर मोदी का संदेश साफ था कि गहमरी का काम 2014 के बाद की भाजपा सरकार ने किया। नेहरू के समय में बनीं पटेल आयोग की संस्तुति पर गाजीपुर में रेल सह सड़क परियोजना का काम 2014 के बाद ही शुरू हुआ। साथ ही कोरोना महामारी जैसी आपदा में गरीब के चूल्हे का ध्यान रखा गया। उस दौरान फ्री टीकाकरण और फ्री राशन का जिक्र करते हुए लोगों की तकलीफों को बांटने वाला लोक कल्याणकारी चेहरा प्रस्तुत किया गया।
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इसके अगले पल वे गाजीपुर की जातिवादी मानसिकता और जातिगत वोटों पर बयान करते रहे। जिस पर बोले कि ये घोर परिवारवादी चाहते हैं कि लोग जातियों में बंट जाएं ताकि उनका खेल चलता रहे। दरअसल, भाजपा की मजबूरी भी है कि जिले का ओबीसी वोट साधा जाए। क्योंकि जनपद ओबीसी बहुल होने के साथ भाजपा प्रत्याशियों की नैया ओबीसी वोटरों के हाथ में है। (संवाद)
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