कोई तो बताए, क्या था मेरे पापा का कसूर। जिसके चलते खून के प्यासे दरिंदों ने मुझसे मेरे पापा को छीन लिया। अफसोस है घटना के वक्त बैंक के पास तमाम लोग थे, लेकिन भाग रहे बदमाशों को पकड़ने की किसी ने हिम्मत नहीं दिखाई। लेकिन प्लीज अब तो आपमें से कोई आगे आए और बदमाशों को पहचानते हों तो बताकर पुलिस की मदद करें। जिससे पापा के कातिलों को सजा मिले। सत्याग्रह स्थल पर बिलखते मनोज सिंह के पुत्र बंटी की यह व्यथा सुनकर हर किसी की आंखें भर आईं।
सत्याग्रह स्थल पर अरुण सिंह ने जैसे ही बंटी को बोलने के लिए माइक थमाई वह फफक-फफक कर रो पड़ा। माइक से उसके रोने की आवाज सुनकर सभी की आंखें नम हो गईं। काफी देर बाद खुद को संभालने के बाद रुंधे गले से बंटी ने घटनास्थल के आसपास रहने वाले लोगों और दूकानदारों से विनती की कि वह उसके पापा की हत्या करने वाले बदमाशों को पकड़वाने में पुलिस की मदद करें। कहा कि पापा की मौत के बाद मम्मी और बहनों के आंसू नहीं थमे हैं।
आप लोगों के भी बच्चे होंगे, इसलिए आप लोग समझ सकते हैं कि अगर किसी पत्नी का सुहाग उससे छिन जाए और संतानों के सिर से पिता का साया उठ जाए तो उस पर क्या बीतती होगी। जहां तक मैं जानता हूं उनकी किसी से कोई अदावत नहीं थी। सबके सुखदुख में वह शामिल होते थे।
वह यारों के यार थे और बहुत अच्छे पिता। दादा के दुलारे और आज्ञाकारी पुत्र थे। यदि असली कातिल पकड़े नहीं गए और उन्हें मैं सजा नहीं दिला पाया तो यह कसक मुझे ताउम्र्र रहेगी और इसका जिम्मेदार कोई और नहीं, बल्कि खाकी होगी।