सरकारी जमीन पर काबिज लोगो के दिन बहुरने वाले हैं। वजह इस तरह के कब्जों की जमीन को सरकार फ्री होल्ड करने की तैयारी कर रही है। इस एक खबर ने अचानक लोगोें के मन भूमि का मालिक बनने के सपने को फिर से जगा दिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जनपद में करीब कुल 2200 एकड़ में लोग काबिज हैं, जिसकी कीमत अरबों रुपये आंकी जा रही है। इसमें कुछ जमीन पट्टे पर दी गई है और कुछ पर अवैध कब्जे हैं। जिला प्रशासन के लाख कोशिश के बाद भी पिछले एक दशक में महज 10 फीसदी ही अवैध कब्जे हटा सका है। अकेले शहर में भी एक बड़ा भूखंड अवैध कब्जेदारों के पास है।
राजस्व परिषद के प्रशासन और प्रबंधन के अधीन आने वाली बड़ी मात्रा में जमीन पर अवैध कब्जा है। कोई खेती कर रहा है तो किसी ने मकान बनवा लिया है। जबकि कई ने अवैध कब्जा कर रखा है। सरकार इसे कब्जे से मुक्त नहीं करवा पा रही है। वहीं कब्जेदारों में कारवाई को लेकर भय सताता रहा है। इसी क्रम में सरकार में तय सीमा के बीच के कब्जों और पट्टों की जमीन को फ्री होल्ड कर उसका मालिकाना हक, पट्टा धारक कब्जेदार को देने और उसके एवज में तय शुल्क लेने का प्रस्ताव किया है।
शहर सहित जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में जमीन पर अवैध ढंग से कब्जा किया गया है। अकेले शहर के गोराबाजार क्षेत्र में नजूल की भूमि पर दर्जनों की संख्या में आवासीय एवं व्यवसायिक प्रतिष्ठान का निर्माण कराकर लोग बड़े आराम से रह रहे है। नजूल की भूमि पर निर्माण कराने वाले कई लोगों को नोटिस दिया गया है। अब अवैध कब्जों की जमीन को फ्री होल्ड कराने की सरकार की तैयारी करने फैसले के बाद अवैध निर्माणकर्ता राहत महसूस कर रहे है।