बाढ़ के खतरे से तटीय क्षेत्र के लोग सहमे
चौदह संेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही गंगा ने नदी किनारे रहने वाले लोगों के चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ प्रभावित इलाके के लोगों का सुकून छीन गया है। शुक्रवार को रात से ही गंगा के जलस्तर में वृद्धि शुरु हो गई है। चौदह सेंमी प्रति घंटा की रफ्तार से गंगा में बढ़ाव हो रहा है। अगर इसी रफ्तार से गंगा में वृद्धि होती रही तो जल्दी ही तटवर्ती क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे में तटवर्ती लोगों की निगाहें गंगा की लहरों पर टिक गई हैं और उन्हें अपनी फसलों के साथ आशियाने की चिंता सताने लगी है। बाढ़ की आशंका से गंगा किनारे बोई गई चरी को किसान काटने में जुट गए हैं।जिले की सीमा से होकर गंगा समेत छोटी-बड़ी नौ नदियां गुजरती हैं। जिले का अधिकांश भू-भाग गंगा से घिरा हुआ है। कई गांवों की आबादी गंगा के किनारे ही आबाद है।
जहां के लोगों के लिए गंगा ही आजीविका का साधन हैं, लेकिन बरसात शुरू होने पर गंगा के किनारे रहने वाले रहवासियों के ऊपर बाढ़ का खतरा मंडराने लगता है। शुक्रवार की रात से गंगा के जलस्तर में वृद्धि का क्रम शुरू हो गया। केंद्रीय जल आयोग के स्थल प्रभारी हरिनाथ ने बताया कि चौदह सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार में जलस्तर में बढ़ोत्तरी हो रही है।
शनिवार की सुबह आठ बजे 54.200 सेंमी, नौ बजे 54.320, 10 बजे 54.440, 11 बजे 54.580 और 12 बजे 54.720 सेंटी मीटर दर्ज किया गया, लेकिन खतरे के निशान से गंगा अभी काफी दूर हैं। फिर भी गंगा में उफनाती लहरों को देखकर तटवर्ती इलाकों में रह रहे लोगों और उनके परिवारीजनों की निगाहें गंगा पर ही टिकी हुई हैं। उन्हें बाढ़ का खतरा भी सता रहा है।
जिन किसानों की फसले गंगा के किनारे हैं वे परेशान हैं। किसानों ने चरी की कटाई करना शुरू कर दिया हैं। 2014 में आई बाढ़ ने जबरदस्त तबाही मचाई थी।